हैदराबाद, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री वाई. एस. चौधरी के खिलाफ कर्ज नहीं चुकाने के मामले में एक स्थानीय अदालत से जारी गैर जमानती वारंट को हैदराबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को रद्द कर दिया।
उच्च न्यायालय ने मंत्री को संबंधित अदालत में पांच मई को पेश होने को कहा है। यह मामला मॉरीशस के एक बैंक ने दर्ज कराया है जिसमें मंत्री पर कर्ज नहीं चुकाने (डिफाल्ट) का आरोप लगाया गया है।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री चौधरी ने अपनी याचिका में उच्च न्यायालय से अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे और गैर जमानती वारंट को रद्द करने की मांग की थी।
तेलुगु देशम पार्टी के नेता चौधरी ने कहा है कि चूंकि वह सुजान यूनिवर्सल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के एक मात्र गैर कार्यकारी निदेशक हैं, इसलिए उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
उच्च न्यायालय ने वारंट रद्द करते हुए मामले की सुनवाई 16 जून तक के लिए टाल दी।
गत सात अप्रैल को अदालत के समन पर तीसरी बार व्यक्तिगत रूप से हाजिर नहीं होने पर अपर मुख्य महानगर दंडाधिकारी ने मंत्री की गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया था।
मॉरीशस कमर्शियल बैंक के वकील ने निचली अदालत से कहा था कि मंत्री अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं। इसके साथ ही उसने उनकी गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वारंट जारी करने की मांग की थी।
चौधरी व अन्य पर करीब 106 करोड़ रुपये कर्ज की अदायगी नहीं करने का आरोप है। यह कर्ज मॉरीशस स्थित हेस्टिया होल्डिंग्स ने लिया था। यह सुजान यूनिवर्सल इंडस्ट्रीज लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी है।
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