उज्जैन, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। उज्जैन में शुरू होने वाले सिंहस्थ कुंभ से पहले अखाड़ों के पहुंचने का सिलसिला जारी है। सोमवार को महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई निकली, जिसमें देशी-विदेशी, साधु-संत बड़ी संख्या में शामिल हुए।
सिंहस्थ कुंभ में साधु-संतों के अखाड़ों के प्रवेश को प्रवेशाई कहा जाता है। उज्जैन सिंहस्थ की सोमवार को छठी पेशवाई निकली। पंचायती महानिर्वाणी अखाडे की पेशवाई का नागरिकों ने पुष्पवर्षा से स्थान-स्थान पर स्वागत अभिनन्दन किया। पेशवाई में आगे-आगे हाथी, घोडे, ऊंट चल रहे थे जिन पर सवार नागा साधु नागरिकों से अभिनन्दन स्वीकार कर रहे थे। इस पेशवाई में देशी के साथ विदेशी शिष्य भी आकर्षण का केंद्र रहे।
इस पेशवाई का खास आकर्षण एक लम्बी श्रृंखला में हाथों में छत्र और चवर लिए हुए शिष्यगण थे। रंग-बिरंगे छत्र एक अलग दृश्य उत्पन्न कर रहे थे। पैरों में घुंघरू बांधे नृत्य करते घोड़े ने अलग शमा बांधा। पेशवाई में महिलाओं की कलश यात्रा भी थी। इस दौरान फूलों की कई तोपे पेशवाई पर फूल बरसा रही थी। पेशवाई में अटल अखाड़ा भी सम्मिलित हुआ।
इस पेशवाई में महानिर्वाणी अखाड़े के आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वोकानंदजी महाराज, महामण्डलेश्वर संतोषपुरी गीताभारती, शिवचैतन्यपुरी, विश्वेशनंदगिरि, प्रेमानंद, आत्मानंदपुरी, कमलानंद गिरि, स्वामी दिव्यानंद गिरि, अभैद्यानंदन गिरि, योगानंद सरस्वती, रामेश्वरानंद सरस्वती, विश्वानत्मनंद गिरि, विद्यानंदगिरि, प्रणवानंद सरस्वती, स्वामी नित्यानंद गिरि आदि साधु-संत सम्मिलित हुए।
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