नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सम-विषम योजना के दूसरे चरण में वकीलों को यातायात प्रतिबंध से छूट देने की मांग पर दिल्ली सरकार से जवाब दाखिल करने को मंगलवार को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की पीठ ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या उसने योजना को लागू करने से पहले जनता और विभिन्न पेशेवर संघों के प्रतिवेदनों पर विचार किया था?
सरकार को अगली सुनवाई की तिथि 25 अप्रैल तक इस पर जवाब दाखिल करना है।
चारपहिया वाहनों के आखिरी अंक के आधार वाली सम-विषम योजना के दूसरे चरण की शुरुआत अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने गत 15 अप्रैल को की थी, जो इस माह के समाप्त होने तक चलेगी।
दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव खोसला द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली सरकार द्वारा पंद्रह दिनों के लिए लागू इस योजना की अधिसूचना भेदभाव पूर्ण, गैरकानूनी, अनुचित एवं संविधान की भावना के प्रतिकूल है।
उन्होंने मोटर वाहन कानून में उचित सुधार किए बगैर दो हजार रुपये जुर्माना लगाने को भी चुनौती दी है।
याचिका में कहा गया है कि यह अधिसूचना कानून से जुड़ी बिरादरी को एक वकील के रूप में दिल्ली की विभिन्न अदालतों और न्यायाधिकरणों में अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभाने में बाधा डाल रही है।
खोसला ने कहा है, “यह स्पष्ट है कि पेशेवरों के काम के समय से जुड़े अध्ययन/शोध के बगैर यह नीति जल्दबाजी में लागू की गई है।”
उन्होंने आगे कहा कि वकील सम-विषम योजना में छूट के हकदार हैं, क्योंकि वकील अदालतों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और नागरिकों के अधिकारों की हिफाजत करने में सहायता करते हैं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि दूसरा चरण लागू करने से पहले जनवरी में सम-विषम योजना के प्रथम चरण में वायु प्रदूषण के आंकड़ों का सरकार द्वारा नियुक्त एजेंसी से विश्लेषण कराना चाहिए था।
याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि वह सरकार को निर्देश दे कि विभिन्न पेशेवर संगठनों के संघों सहित जनता से सुझाव लेने के बाद नीति तैयार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाए।
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