लखनऊ, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) आर.के. माथुर ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत आवेदनों की बढ़ती संख्या और उनके निपटारे में लगने वाले समय को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने यहां शनिवार को कहा कि लंबित मामलों के जल्दी निपटारे के लिए ऑनलाइन सुनवाई जरूरी है।
उन्होंने महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग के पैटर्न को भी कारगर बताते हुए कहा कि इसमें राज्य सूचना आयुक्तों को राजधानी में सीमित न कर मंडल स्तरों पर तैनाती दे दी है। इससे वहां सूचना आवेदन निपटने की औसत समय-सीमा चार से छह माह है।
सीआईसी ने इस पैटर्न को आवेदनकर्ताओं के लिए अधिक सुविधाजनक बताया। वह लखनऊ में 10वें राष्ट्रीय सेमिनार में शनिवार को बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने आए थे।
कार्यक्रम में उप्र के मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ए.आर. मसूदी, पूर्व रक्षा सचिव और उप्र के पूर्व मुख्य सचिव डॉ. योगेंद्र नारायण भी मौजूद रहे।
इस मौके पर उन्होंने एक किताब का विमोचन भी किया।
सीआईसी ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग दिल्ली और एनसीआर में तैनात अफसर या आवेदकों को ही तलब करता है। देश के अन्य सभी हिस्सों में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए ही सुनवाई की जाती है। यहां के सभी आदेश, तारीखों को ऑनलाइन डाल दिया जाता है। इससे आवेदकों को बहुत आसानी होती है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग प्रतिमाह तीन हजार से अधिक मामलों की सुनवाई करता है। इसमें देश के सभी राज्यों के अलावा विदेशों में स्थित दूतावास और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले भी आते हैं।
सीआईसी ने माना कि इस समय केंद्रीय सूचना आयोग में 35 हजार से अधिक मामले लंबित हैं।
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