बेंगलुरू, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से ‘परेन्टल एलीअनैशन’ (खराब या टूट चुके वैवाहिक स्थिति में एक अभिभावक द्वारा बच्चे के मन में दूसरे के प्रति घृणा, नफरत के भाव पैदा करना) को अपराध घोषित करने की मांग की है। उन्होंने बाल अधिकारों की हिफाजत के लिए साझा परवरिश को अनिवार्य करने पर भी जोर दिया।
बाल अधिकार कार्यकर्ता कुमार वी. जागीरदार ने रविवार आईएएनएस से कहा कि देशभर से इस संबंध में एक याचिका पर कई लोगों ने हस्ताक्षर किए, जिसे केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी को भेजा गया है। इसमें माता-पिता द्वारा आपस के खराब या टूट चुके संबंधों के कारण बच्चे के मन में एक-दूसरे के प्रति नकारात्मक बातें बोने को दंडनीय अपराध घोषित करने की मांग की गई है।
कई देशों, खासकर पश्चिमी देशों में बाल अधिकार समूह 25 अप्रैल को ‘परेन्टल ऐलीअनैशन अवेयरनेस डे’ के रूप में मनाते हैं।
जागीरदार ने कर्नाटक के बाल अधिकार संरक्षण आयोग से माता-पिता द्वारा बच्चे के मन में एक-दूसरे के प्रति द्वेष पैदा करने की कोशिश से संबंधित शिकायतों की जांच करने और इस संबंध में उचित कार्रवाई करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि दहेज, घरेलू हिंसा, अभिभावकों द्वारा अलगाव की स्थिति में बच्चों को पास रखने तथा उनकी देखभाल से संबंधित मामलों पर जल्द सुनवाई होनी चाहिए।
जागीरदार चाइल्ड राइट्स इनिशिएटिव फॉर शेअर्ड परेन्टिंग (सीआरआईएसपी) के अध्यक्ष हैं, जो माता-पिता के वैवाहिक जीवन में तनाव, अलगाव या तलाक के बावजूद बच्चों के प्यार पाने और समुचित देखभाल के अधिकार को बढ़ावा देता है।
सीआरआईएसपी द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ बेंगलुरू में ही परिवार अदालतों में तलाक के 20,000 से ज्यादा मामले लंबित हैं।
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