मुंबई, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। एक विशेष अदालत ने साल 2006 में हुए मालेगांव सीरियल विस्फोट मामले के सभी नौ मुस्लिम युवकों को बरी कर दिया। इनमें एक की हाल में मौत हो चुकी है।
बचाव पक्ष के वकील शाहिद नदीम अंसारी ने आईएएनएस से कहा, “सभी नौ आरोपियों द्वारा दोषमुक्ति के लिए दाखिल अर्जी पर सुनवाई के बाद विशेष मकोका अदालत ने आज (सोमवार) दोपहर अपना फैसला सुनाया। सभी को दोषमुक्त करार दिया गया।”
उन्होंने कहा कि नौ आरोपियों में से एक शब्बीर अहमद मसीउल्लाह की कुछ महीने पहले एक दुर्घटना में मौत हो गई थी।
गिरफ्तारी के बाद इन सभी को पांच साल का वक्त जेल में काटना पड़ा।
वकील अंसारी ने कहा कि बरी किए गए बाकी आठ युवकों में नुरुल हुदा, रईस अहमद रजबअली मंसूरी, सलमान फारसी अब्दुल लतीफ आईमी, फरोग इकबाल अहमद मागदुमी, शेख मोहम्मद अली आलम, आसिफ बशीर खान, मोहम्मद जाहिद अब्दुल माजिद अंसारी तथा अबरार अहमद गुलाम अहमद शामिल हैं।
मालेगांव में आठ सितंबर, 2006 में हुए विस्फोटों के मामले में इन्हें गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद इनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
विस्फोट एक मुस्लिम कब्रिस्तान व एक मस्जिद के निकट शब-ए-बरात पर्व के दिन दोपहर की नमाज के वक्त हुआ था।
बम दो साइकिलों में छिपाकर रखे गए थे। विस्फोट और इसके बाद भगदड़ मचने के कारण 37 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा, स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) तथा जैश-ए-मोहम्मद का हाथ बताया गया और जांच की गई।
प्रतिबंधित सिमी से कथित तौर पर संबंध रखने वालों सहित सभी आरोपियों ने जमानत के लिए याचिका दायर की, जिसके बाद उन्हें 16 नवंबर, 2011 को जमानत मिल गई।
बीते 12 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के वकील प्रकाश शेट्टी ने विशेष न्यायाधीश से कहा था कि अदालत को आरोपियों की दोषमुक्ति की याचिका पर फैसला लेना चाहिए।
महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दस्ता (एटीएस) तथा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से मामले की जांच का जिम्मा लेने वाली एनआईए ने अदालत से कहा था कि सभी नौ आरोपियों के विस्फोट में शामिल होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं, जिसके बाद सोमवार को सभी आरोपियों के बरी होने का रास्ता साफ हो गया।
वकील अंसारी ने कहा कि साल 2014 में बरी करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान एनआईए ने आरोपियों के खिलाफ एटीएस तथा सीबीआई के मामलों पर शंका जताते हुए उन्हें बरी करने की मांग की थी।
एनआईए ने कहा कि उसे दोषमुक्ति की याचिका पर कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि उसने जो सबूत इकट्ठा किए, वे एटीएस तथा सीबीआई के सबूतों से मेल नहीं खाते, जिनके आधार पर सभी नौ लोगों पर मुकदमा चलाया गया था।
मुंबई से 300 किलोमीटर पूर्वोत्तर में स्थित मुस्लिम बहुल मालेगांव 29 दिसंबर, 2008 को एक और धमाके से थर्रा गया था, जिसमें कथित हिंदू कट्टरपंथियोंका हाथ होने की बात कही गई।
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