नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की जमानत रद्द करने संबंधी याचिका को स्वीकार कर लिया और इस संबंध में दिल्ली पुलिस को 19 जुलाई को जवाब दाखिल करने को कहा।
न्यायमूर्ति पी.एस. तेजी ने कहा, “मैं याचिका पर सुनवाई करूंगा, जवाब दाखिल करें।”
कन्हैया कुमार की जमानत रद्द करने को लेकर दो याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
पहली याचिका में कहा गया है कि कन्हैया कुमार ने जमानत के लिए गलत हलफनामा दाखिल किया है, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
याचिकाकर्ताओं में से एक वकील आर.पी. लूथरा ने इस आधार पर जमानत रद्द करने की मांग की है कि कन्हैया राष्ट्रविरोधी भाषण दे रहे थे।
इस याचिका में कहा गया है कि कन्हैया कुमार ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 2 मार्च को सशर्त जमानत मिलने के बाद जमानत की शर्तो का उल्लंघन किया।
अदालत ने कहा था, “कन्हैया कुमार प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी राष्ट्रविरोधी गतिविधि में भाग नहीं ले सकते।”
कन्हैया कुमार को 9 फरवरी को कश्मीर मुद्दे पर जेएनयू परिसर में आयोजित एक विवादित कार्यक्रम में भाग लेने को लेकर राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
इस याचिका में कहा गया है, “कन्हैया कुमार अपनी राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को जारी रखे हुए हैं। उनका भारतीय सेना पर यह आरोप लगाना कि सैन्यकर्मी कश्मीर में महिलाओं से दुष्कर्म कर रहे हैं, बर्दाश्त से बाहर है।”
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि कन्हैया कुमार को दी गई जमानत को जल्द से जल्द रद्द किया जाए, ताकि भारत की प्रतिष्ठा को भविष्य में होनेवाले नुकसान को कम किया जा सके।
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