लखनऊ, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य (एमएलसी) नामित होने के बाद वरिष्ठ शायर व प्रोफेसर वसीम बरेलवी ने शनिवार को समाजवादी पार्टी की सरकार की जमकर तारीफ की और कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है, उसके तहत वह रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ेंगे।
बरेलवी ने हालांकि यह भी कहा कि एमएलसी नामित होने के बाद अब उत्तर प्रदेश की विधान परिषद में साहित्यकारों, शायरों और लेखकों की दिक्कतें दूर करेंगे।
लखनऊ में शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आईएएस अधिकारी पार्थसारथी सेन शर्मा की पुस्तक ‘हम हैं राही प्यार के’ के विमोचन समारोह के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा, “मेरी पहली जिम्मेदारी होगी कि साहित्य से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में दूरदराज के जो लोग काम कर रहे हैं, उनके काम को तवज्जो दिलाई जाए। किसी को प्रकाशक नहीं मिला तो किसी को सम्मान नहीं मिला, किसी की कृतियों पर चर्चा नहीं हुई..। मेरी पूरी कोशिश होगी कि बतौर एमएलसी ऐसे लोगों का काम सामने आ सके।”
वसीम बरेलवी के मुताबिक, साठ साल से ऊपर के साहित्यकार, कलमकार, शायर जिनको अब तक कोई प्लेटफार्म नहीं मिला, उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान जैसी सरकारी अकादमियां व संस्थान ऐसे रचनाकारों के साथ एक शाम गुजारें और ऐसे लोगों के कृतित्व व व्यक्तित्व पर जो बोलने वाले लोग हैं, उन्हें आमंत्रित किया जाए।
उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए प्रायोजकों से भी मदद ली जाए। कुछ ऐसा हो, ताकि इन लेखकों और रचनाकारों को भी लगे कि उनकी जिंदगी भर की मेहनत बेकार नहीं गई।
वसीम बरेलवी ने कहा, “समाज में जो चीजें रचनात्मक दिशा में ले जाने वाली हैं, मैं खुद ऐसी दिशा में प्रयासरत रहा हूं। मेरी शायरी भी इसी दिशा में आगे बढ़ी है और अब जो जिम्मेदारी मुझे मिली है मैं उसके तहत रचनात्मक दिशा में ही आगे बढं़ूगा। मैं नेताजी (मुलायम सिंह यादव) और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का बहुत कृतज्ञ हूं कि उन्होंने मुझे यह सम्मान दिया है, मगर यह मेरा खुद का नहीं, बल्कि साहित्य और कलम व फकीरी का सम्मान है।”
उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार में साहित्य और संस्कृति को बखूबी सम्मान मिलता रहा है। चाहे वह यशभारती सम्मान हो या फिर गोपाल दास नीरज को भाषा संस्थान तथा उदय प्रताप सिंह जैसे साहित्यकार व कवि को हिंदी संस्थान की जिम्मेदारी सौंपने का मामला हो। ये लोग अपने स्तर पर काम कर रहे हैं। प्रदेश सरकार ने कैफी आजमी एकेडमी की भी काफी मदद की है।
प्रो. बरेलवी की दो किताबें (शायरी के संग्रह) जल्द आने वाली हैं। अब तक उनकी सात किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। देश विदेश में मुशायरों के मंचों पर वसीम बरेलवी अपनी खास अंदाज की शायरी के लिए एक जाना-पहचाना नाम है।
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