टीकमगढ़, 2 मई (आईएएनएस)। सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड में लोगों का जीना मुहाल हो गया है। आलम यह है कि कर्ज से दबे परिवार बच्चों तक का सौदा करने से नहीं हिचक रहे हैं, नया मामला टीकमगढ़ जिले का है।
यहां एक आदिवासी महिला ने कथित तौर पर अपनी नाबालिग बेटी का एक लाख रुपये में सौदा कर दिया, यह खुलासा किया है महिला के भाई और नाबालिग लड़की के मामा ने, जबकि महिला शादी करने की बात कह रही है। वहीं प्रशासन पूरे मामले की जांच करा रहा है।
मामला टीकमगढ़ जिले के देहात थाना क्षेत्र के मोहनपुरा गांव का है। यहां की आदिवासी महिला काशीबाई पर उसी के भाई गणेश ने आरोप लगाया है कि उसने (काशीबाई) अपनी नाबालिग 14 वर्षीय बेटी का सागर जिले के पिपरिया गांव के धर्मेद्र को एक लाख रुपये में बेचा है। इस सौदे में गांव के ही कुछ लोगों ने दलाल की भूमिका निभाई है।
गणेश ने संवाददाताओं को बताया कि उसकी बहन काशीबाई ने मकान बनाने सहित अन्य काम के लिए कर्ज ले रखा है, इसे चुकता करने के लिए उसने छठी कक्षा में पढ़ने वाली अपनी बेटी का एक लाख रुपये में सौदा किया है। वहीं महिला काशीबाई का कहना है कि उसने अपनी बेटी को बेचा नहीं है, बल्कि शादी की है।
टीकमगढ़ की जिलाधिकारी प्रियंका दास ने सोमवार को आईएएनएस को बताया कि यह मामला उनके भी संज्ञान में आया है। बच्ची का सौदा नहीं किया गया है, बल्कि उसकी मां शादी की बात कह रही है। महिला की बात मानी जाए तो उसने नाबालिग का विवाह किया है, बाल विवाह भी अपराध है और इसका भी प्रकरण बनेगा।
विधवा महिला की आर्थिक स्थिति को लेकर जिलाधिकारी दास का कहना है कि उसके पास गरीबी रेखा से नीचे का राशन कार्ड है, उसे नियमित राशन मिल रहा है और वह सरकार की सभी योजनाओं का लाभ ले रही है। उसके बावजूद प्रशासन मामले की जांच कर रहा है, वहीं पुलिस दल सागर जिले के पिपरिया गांव गया हुआ है।
ज्ञात हो कि इससे पहले भी बच्चों को गिरवी रखे जाने के मामले सामने आ चुके हैं। राजस्थान के मवेशी कारोबारियों के चंगुल से छूटकर दो बच्चे झांसी पहुंचे थे और उन्होंने खुलासा किया था कि उनके परिजनों ने मवेशी कारोबारियों के यहा मवेशी चराने के लिए गिरवी रखा था।
बुंदेलखंड में मध्यप्रदेश के छह और उत्तर प्रदेश के सात जिले आते हैं। इन सभी जिलों का एक जैसा हाल है, सूखे ने किसानों की कमर तोड़ दी है, सभी जलस्रोत सूख चुके हैं, लोग पीने का पानी कोसों दूर से लाने को विवश हैं। रोजगार मिल नहीं रहा है। यहां से बड़ी संख्या में लोग पलायन चुके हैं।
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