कतर के लिए ही जासूसी के आरोप का सामना कर रहे पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी से संबंधित मामले की सुनवाई स्थगित हो गई।
जून महीने में मिस्र के मुफ्ती से परामर्श के बाद सजा को या तो मंजूरी दी जा सकती है या फिर इसे कम किया जा सकता है। अदालत मुफ्ती के जवाब पर विचार करने के लिए बाध्य नहीं है।
मिस्र के कानून के अनुसार, मौत की सजा पर मुफ्ती के हस्ताक्षर की जरूरत होती है। उनकी राय कोई बाध्यता नहीं, लेकिन अदालत इसका आदर करती है।
बचाव पक्ष को फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है। मुर्सी को तीन अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास तथा 20 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मुर्सी तथा अन्य 10 सह आरोपियों ने गोपनीय दस्तावेजों को कतर को मुहैया कराया।
ये दस्तावेज कथित तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित थे, जिसे लाखों डॉलर लेकर कतर की खुफिया एजेंसी को बेच दिया गया।
अल जजीरा ने मिस्र के उस आरोप को खारिज किया है, जिसके मुताबिक नेटवर्क मुर्सी से मिला हुआ था।
अल जजीरा के मध्य पूर्व के विश्लेषक याहिया घानेम ने फैसले पर कहा, “मेरा मानना है कि मिस्र की न्याय प्रणाली में यह एक कमजोर बिंदू है, जिससे पूरे देश को नुकसान हो सकता है, खासकर तब जब मामला मानवाधिकार या आजादी का हो।”
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