मुम्बई, 11 मई (आईएएनएस)। तीन दशकों से बांग्ला सिनेमा में सक्रिय सुपरस्टार प्रसन्नजीत चटर्जी का कहना है कि फिल्मों की कोई भाषा नहीं होती।
प्रसन्नजीत ने आईएएनएस से कहा, “मैं इतने लंबे समय से बांग्ला सिनेमा में काम कर रहा हूं। मैंने मुंबई में भी काम किया है। 340 फिल्मों करने के बाद, मैंने महसूस किया कि सिनेमा की कोई भाषा नहीं होती है। इससे कोई फर्क नही पड़ता कि आप कहां से आते हैं, फिल्म बनाने प्रक्रिया सभी जगह समान है।”
उन्होंने कहा कि सभी जगह फिल्म बनाने की प्रक्रिया एक जैसी होती है। हर फिल्म के निर्माण में कैमरा, अभिनेता की जरूरत पड़ती ही है। केवल फिल्मों के बजट में अंतर होता है। हो सकता है कि हॉलीवुड की फिल्म करूं तो वह बड़ी कहलाए, लेकिन प्रक्रिया समान ही होगी।
प्रसन्नजीत के बांग्ला फिल्मों में काफी प्रशंसक हैं। उन्होंने कहा कि वह केवल स्टार नहीं, बल्कि एक अभिनेता भी हैं।
उन्होंने कहा, “एक अभिनेता के रूप में मैंने खुद को चुनौती दी है। मैंने 300 व्यावसायिक फिल्में की हैं। लेकिन, अब साल में दो से तीन फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया है और यह अपने आप में एक चुनौती थी। मैं सिर्फ एक स्टार नहीं हूं, मैं एक अभिनेता भी हूं।”
प्रसन्नजीत, ऋतुपर्णो घोष की ‘चोखेर बाली’ और ‘दोसर’ में अपने अभिनय के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 1968 में जगनाथ चटर्जी की ‘छोट्टो जीगनाशा’ में बाल कलाकार के रूप में काम से शुरूआत की थी, जिसमें उनके पिता ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
प्रसन्नजीत ‘ट्रैफिक’ फिल्म में भी हैं। उनके साथ मनोज वाजपेयी, जिम्मी शेरगिल, प्रम्ब्रता चटर्जी मुख्य भूमिका में हैं।
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