मध्यप्रदेश के उज्जैन में चल रहे सिंहस्थ कुंभ के दौरान आयोजित तीन दिवसीय ‘अंतर्राष्ट्रीय विचार कुंभ’ के समापन मौके पर मोदी ने कहा कि इन दो बड़े संकटों का समाधान विस्तारवाद नहीं है, क्योंकि युग बदल चुका है। ‘हमारा रास्ता तुम्हारे रास्ते से ज्यादा अच्छा है, यही तो विवाद का कारण है।’
उन्होंने कहा, “हम हॉरिजेंटल (क्षतिज) कितना भी दूर जाएं, समस्या का समाधान नहीं है, इसके लिए हमें वर्टिकल (लंबवत) जाना होगा, अपने भीतर जो कुछ है, उसे ऊपर उठाना होगा। व्यवस्थाओं को आधुनिक रूप देने की जरूरत है।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारी परंपरा में ज्ञान को अजर-अमर माना गया है। विश्व में जो भी श्रेष्ठ है, उसे लेना और समाहित करना हमारी आदत है। हम ऐसे समाज के लोग हैं, जहां विविधताएं हैं। हमें आंतरिक विवादों के प्रबंधन में महारत हासिल है। भारत हठवादिता से नहीं, बल्कि दर्शन से जुड़ा देश है। हमारा दर्शन जीने की प्रेरणा देता है।”
उन्होंने आगे कहा, “आज भारत के पारिवारिक जीवन मूल्यों को समूचा विश्व स्वीकार कर रहा है। हमारे सामने चुनौती है कि समय की कसौटी पर खरे उतरें और जीवन मूल्यों के प्रति समाज को जागरूक करें।”
समारोह में श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे। अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने की।
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