हिंदुत्व को आतंकवाद से जोड़ना गलत : शिवसेना

मुंबई, 16 मई (आईएएनएस)। साध्वी प्रज्ञा तथा पांच अन्य आरोपियों को साल 2008 में हुए मालेगांव विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा पिछले सप्ताह दी गई क्लीन चिट की ओर इशारा करते हुए शिवसेना ने सोमवार को कहा कि ‘हिंदुत्व’ तथा ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ को आतंकवाद से जोड़ना सही नहीं है।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में संपादकीय लेख में लिखा है, “पाकिस्तान की मदद से कुछ मुसलमान कट्टरपंथियों द्वारा आतंकवाद की साजिश का दमन करने के बजाय अल्पसंख्यक समुदाय के तुष्टिकरण के लिए हिंदू आतंकवाद का हौवा खड़ा किया गया है।”

लेख के मुताबिक, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल एस. पुरोहित तथा ऐसे अन्य राष्ट्रवादियों को महाराष्ट्र तथा केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने आतंकवाद के मामले में जान बूझकर फंसाया था।

शिवसेना ने कहा, “लेकिन, वे इस बात का अहसास करने में नाकाम रहे कि ऐसा करके वे पाकिस्तान के हाथों को मजबूत कर रहे हैं..जब भी भारत ने आतंकवादियों को भारत को सौंपने की मांग की, तब पुरोहित जैसे लोगों को सौंपने की मांग करने के लिए पाकिस्तान का हौसला बढ़ा। पाकिस्तान को यह सुनहरा मौका कांग्रेस ने थाल में सजा कर दिया।”

संपादकीय में लिखा गया है कि पाकिस्तान ने तो यहां तक दावा किया कि भारत में हुए आतंकवादी हमलों में उसकी कोई संलिप्तता नहीं है और पलट कर आरोप लगाया कि इन आतंकवादी हमलों के पीछे हिंदू आतंकवादियों का हाथ है।

शिवसेना ने कहा, “स्पष्ट तौर पर ऐसी परिस्थितियां मालेगांव विस्फोट मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण पैदा हुईं..पी.चिंदबरम, शरद पवार तथा दिवंगत आर.आर.पाटिल जैसे नेताओं ने सीना ठोककर कहा कि मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और उन्होंने आतंकवाद को भगवा रंग दिया।”

अपने ही देश में हिंदुओं को बदनाम करने की मंशा पर सवाल उठाते हुए शिवसेना ने कहा कि हमारे हिंदू पाकिस्तान या अफगानिस्तान के मुसलमानों की तरह कट्टरपंथी नहीं हैं और वे अपने ही देश का विनाश नहीं करेंगे।

संपादकीय में कहा गया है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की पिछली सरकार ने जांच एजेंसियों को आतंकवाद के नाम पर पुरोहित तथा साध्वी प्रज्ञा जैसे हिंदू राष्ट्रवादियों को फंसाने का दबाव डाला और उनके जीवन के आठ साल की अवधि को बर्बाद किया, लेकिन अब वे निर्दोष साबित हो चुके हैं।

शिवसेना ने आतंकवाद निरोधी दस्ता के अधिकारियों पर सीमा को लांघने, झूठे सबूत तैयार करने, पुरोहित के घर में आरडीएक्स रखने तथा साध्वी प्रज्ञा एवं अन्य को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।

लेख के मुताबिक, साध्वी प्रज्ञा तथा पांच अन्य को निर्दोष घोषित किया गया, जबकि पुरोहित को आतंकवाद के आरोपों से दोषमुक्त किया गया और सभी आरोपियों पर से महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) को हटा दिया गया।

शिवसेना ने मांग की, “इन कृत्यों को अंजाम देने वाले अधिकारियों का पर्दाफाश किया जाना चाहिए, उन पर मामला दर्ज करना चाहिए। साध्वी प्रज्ञा तथा अन्य पीड़ितों द्वारा आठ साल जेल में बिताए गए पलों की क्षतिपूर्ति नहीं की जा सकती।”

शिवसेना ने संपादकीय में मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी 21 निर्दोष मुसलमानों की दोषमुक्ति का भी स्वागत किया और कहा, “सच्चाई तो यही है कि इस हमले को अंजाम देने वाले लोग पाकिस्तान भागने में कामयाब रहे।”

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