दो बहनों ने ईंट जोड़ शौचालय में बना दी दीवार

घास भूमि में बने घर में शौचालय बनाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन से पात्रता नहीं होने पर पंचायत ने उनकी तंग हालत देख 3000 रुपये। इतनी राशि से केवल प्लींथ स्तर तक सीट लगाकर शौचालय बनाया गया। अब बात आई कि आगे इसका उपयोग किस तरह से किया जाए? जहां पूरे जिले में शौचालय बनाने और गांव-शहर को खुले में शौचमुक्त करने के लिए अभियान चल रहा, वहां पैसे की कमी से अभियान में अपनी भागीदारी को नकारात्मक होता देख दोनों बहनों ने ठाना कि वे खुद घर में रखे ईंट से जुड़ाई कर अपने शौचालय की दीवार को ऊंचा और आत्मसम्मान की रक्षा करेंगी।

दोनों ने अपने अप्रशिक्षित हाथों से ईंट जोड़ा और 5 फीट ऊंची दीवार खड़ा कर दी। बच्चियों की मेहनत और लगन से तैयार शौचालय की दीवार देख मजदूरी करने वाली उनकी मां पांचोबाई काफी गौरवान्वित महसूस कर रही है। वह बताती हैं कि उनके पति रामस्वरूप साहू जो कि रिक्शा चलाते थे, 8 साल पहले चल बसे। परिवार में पीछे रह गईं वे और उनकी दो मासूम बच्चियां। घर में शौचालय नहीं होने की वजह से काफी परेशानी होती थी, लेकिन बच्चियों द्वारा शौचालय का दीवार बना लेने से पांचोबाई काफी खुश हैं।

वे कहती हैं कि अब उनके मान-सम्मान और सेहत को गंदगी की वजह से कोई खतरा नहीं। वाकई इन बच्चियों के जज्बे ने इस सोच को चरितार्थ कर दिया है कि ‘जहां सोच वहां शौचालय’।

ज्ञात हो कि मगरलोड के इस गांव गिरौद की जनसंख्या 1800 है। यहां कुल 350 परिवार हैं, उन्हीं में से एक परिवार पांचोबाई का भी है।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493