इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने तीन लोगों को दुष्कर्म, हत्या तथा निहत्थे नागरिकों का उत्पीड़न करने व उन्हें बंदी बनाने के आरोपों का दोषी पाया। तीनों दोषी भाई हैं।
बचाव पक्ष के वकील मसूद राणा ने फैसले से असंतोष जताते हुए कहा कि वे सर्वोच्च न्यायालय में अपील करेंगे।
जनवरी 2009 में सत्ता में वापसी के बाद शेख हसीना ने सन् 1971 के युद्ध के लगभग 40 वर्षो बाद मार्च 2010 में पहले न्यायाधिकरण की स्थापना की। शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान थे, जिन्होंने बांग्लादेश को आजाद कराने में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
विपक्षी बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी पार्टी के कम से कम चार नेताओं- मोतीउर रहमान निजामी, अब्दुल कादर मोल्ला, मुहम्मद कमारूज्जमान तथा अली अहसान मोहम्मद मुजाहिद- को युद्ध अपराध में दोषी पाए जाने पर पहले ही फांसी दी जा चुकी है।
इनके अलावा, विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता सलाउद्दीन कादर चौधरी को 22 नवंबर, 2015 को फांसी दे दी गई थी।
बीएनपी तथा जमात दोनों ने सरकार द्वारा मुकदमों की सुनवाई को झूठा करार देते हुए अदालत को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि यह एक घरेलू न्यायालय है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने न्यायालयों की कार्यवाही को ‘शो ट्रायल’ करार दिया है।
वर्तमान सरकार का कहना है कि युद्ध के दौरान लगभग 30 लाख लोगों की जान गईं।
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