सड़क नेटवर्क में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर : राष्ट्रपति

नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि आजादी के बाद देश ने बहुत कुछ हासिल किया है, और यह गर्व की बात है कि भारत के पास तकनीकी रूप से सक्षम इंजीनियर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि आज सड़क नेटवर्क के मामले में देश दुनिया में दूसरे स्थान पर है। भारत में 47 लाख किलोमीटर लंबी सड़कें हैं।

भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (2013 एवं 2014 बैच) के अधिकारियों तथा 2015 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भेंट की।

इस अवसर पर राष्ट्रपति कहा, “इंजीनियर प्रमुख ढांचागत क्षेत्रों में कार्यरत हैं। आज भारत के पास तकनीकी रूप से सक्षम इंजीनियर उपलब्ध हैं। हमें इस बात पर गर्व है कि आजादी के बाद हमने बहुत कुछ उपलब्ध किया है। आजादी के समय देश में 10 लाख टन इस्पात का उत्पादन होता था, आज हम प्रति वर्ष नौ करोड़ टन से अधिक इस्पात का उत्पादन कर रहे हैं। वर्ष 1947 में प्रति वर्ष एक लाख से भी कम वाहनों का उत्पादन होता था, आज हम विश्व में सबसे अधिक वाहनों का उत्पादन करने वाले देशों में छठे स्थान पर हैं।”

मुखर्जी ने कहा, “हमारे यहां प्रति वर्ष 64.4 करोड़ टन कोयला पैदा होता है और इस तरह हम विश्व में तीसरे नम्बर के सबसे बड़े कोयला उत्पादक देश हो गए हैं। भारत में आज 46.2 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा एक अरब लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। भारत में 47 लाख किलोमीटर लम्बी सड़कें हैं। इस तरह हमारे यहां का सड़क नेटवर्क विश्व में दूसरे स्थान पर है।”

राष्ट्रपति ने आगे कहा, “इंजीनियरिंग सेवा से अधिकारियों को समाज की सेवा करने का अवसर मिलता है। सभी अधिकारियों को महात्मा गांधी की यह बात याद रखनी चाहिए कि सही निर्णय तक पहुंचने के लिए यह देखना आवश्यक है कि उस निर्णय से निर्धनतम व्यक्ति का कल्याण होगा या नहीं।”

भारतीय इंजीनियरिंग सेवा के 2013 और 2014 बैच के ये अधिकारी इस समय सहायक कर्यकारी अभियंता के रूप में सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय में नियुक्त हैं, जबकि 2015 बैच के प्रशिक्षु अधिकारी गाजियाबाद स्थित सीपीडब्ल्यूडी प्रशिक्षण संस्थान में 35 सप्ताहों का बुनियादी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

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