थाई मंदिर के खिलाफ जानवरों की तस्करी के नए सबूत

बैंकाक, 2 जून (आईएएनएस)। थाईलैंड के अधिकारियों ने गुरुवार को एक ट्रक के अंदर से दो बाघों की खाल बरामद की। ट्रक विवादित बौद्ध मंदिर से बाहर जाने की कोशिश कर रहा था। यह बौद्ध मंदिर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बाघों का इस्तेमाल करता रहा है।

खालों की बरामदगी के अलावा राष्ट्रीय उद्यान संरक्षण विभाग (एनपीसीडी) के सदस्य सोमवार से ही मंदिर की भी जांच कर रहे हैं। उन्होंने सैकड़ों ताबीज बरामद किए हैं जिनमें कहा जा रहा है कि बाघों की हड्डियों एवं दांत के अवशेष मिले हैं।

एफे न्यूज के अनुसार, बुधवार को अधिकारियों ने एक फ्रीजर से बाघ के 40 शावकों के शव बरामद किए थे। ये मात्र एक या दो दिन के थे।

इन शावकों के बारे में वन पशुओं के रजिस्टर में कोई रिकार्ड दर्ज नहीं है। मंदिर के लिए कानून के मुताबिक ऐसा करना जरूरी है। इसका अर्थ यह हुआ कि संरक्षण विभाग अन्य संभावित अपराधों सहित इन्हें गैरकानूनी तरीके से रखने का भी आरोप लगाएगा।

थाई प्रशासन ने सोमवार को कंचनाबरी प्रांत के फा लांग ता बुआ यानासामपन्न मंदिर से 137 बाघों का बचाव शुरू किया है। बाघों की वजह से इस मंदिर को ‘टाइगर टेंपल’ के नाम से भी जाना जाता है।

यह मंदिर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। पर्यटक यहां बाघों के आसपास चहलकदमी कर सकते हैं और बाघों के साथ तस्वीरें ले सकते हैं। ये बाघ दवा के प्रभाव में सुस्त नजर आते हैं। यह उन कारणों में से एक है, जिनकी वजह से पशु अधिकार समूह उद्यान की वर्षो से आलोचना करते रहे हैं।

एक स्थानीय दैनिक खाव सोद के अनुसार, “इस बीच मंदिर प्रबंधन ने अधिकारियों के साथ सहयोग करने से इनकार कर दिया है। इसका अर्थ यह हुआ कि बाघों को वहां से हटाने और दूसरे स्थान पर रखने की यह प्रक्रिया कई दिनों तक चलेगी। हालांकि, मंगलवार तक इनमें से 40 को बचाया जा चुका है।”

छापे के दौरान जानवरों की आंत एवं शरीर के अन्य हिस्सों के भरे डिब्बे मिले हैं। यदि इन्हें हाल का पाया जाता है तो यह वन्यजीव कार्यकर्ताओं के आरोपों की यह और पुष्टि करेगा।

कुछ पशु अधिकार संगठनों ने दावा किया है कि जब बाघ पर्यटकों के साथ होते थे तो लगता था कि उन्हें शांत करने के लिए दवा दी गई है। उनका मंदिर पर आरोप है कि पशुओं की अवैध तस्करी को छुपाने के लिए ये बाघ महज मुखौटा हैं। लेकिन, मंदिर प्रशासन इन सभी आरोपों को गलत बताता रहा है।

इन बाघों में कुछ ऐसे हैं जो थाईलैंड के नहीं हैं। उन्हें देश के वन्यजीव आश्रय स्थलों में ले जाया जाएगा।

छापामारी के बाद से ही मंदिर को जनता के लिए बंद कर दिया गया है।

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