इस बाबत गुरुवार को प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत में सामाजिक कार्यकर्ता प्रताप चंद्रा ने कहा कि 17 अगस्त 2015 को कांग्रेस ने लखनऊ में उग्र प्रदर्शन किया था। जिसमें कांग्रेस नेताओं ने आम नागरिकांे के मूल अधिकारों की जमकर धज्जियां उड़ाई। इसमें पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारियों को गंभीर चोटें आईं थी। जोकि संविधान का उलंघन ही नहीं बल्कि घोर अपराध है। जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
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