तिरुवनंतपुरम, 3 जून (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उम्मीदवार पी. श्रीरामकृष्णन शुक्रवार को 14वीं केरल विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए।
यह परिणाम तो प्रत्याशित था, लेकिन खास बात यह दिखी उन्हें न केवल भाजपा का एकमात्र मत मिला, बल्कि एक मत विपक्षी यूडीएफ से भी मिला।
विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने यह स्वीकार किया कि उनके मोर्चे का एक वोट दूसरे खेमे को मिला।
चेन्निथला ने कहा, “मैं नहीं समझता हूं कि यह काम जानबूझकर हुआ, लेकिन फिर भी हम इस मामले की जांच करेंगे।”
श्रीरामकृष्णन को 92 वोट मिले जबकि संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा के उम्मीदवार वी. पी. सजींद्रन को 46 मत मिले।
140 सदस्यीय विधानसभा में 139 सदस्यों ने वोट डाले, लेकिन एक मत अवैध घोषित कर दिया गया। सभी लोगों ने देखा कि निर्दलीय विधायक पी.सी. जॉर्ज ने सादा मतपत्र मतपेटी में डाला।
वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ)के ‘प्रो-टेम’ अध्यक्ष एस. सरमा ने अपना वोट नहीं डाला।
भाजपा के एक मात्र विधायक ओ.राजगोपाल ने कहा कि उन्होंने श्रीरामकृष्णन को वोट दिया।
इसलिए श्रीरामकृष्णन को एलडीएफ के 90 वोट, भाजपा का एक वोट और एक अन्य वोट मिले।
विधानसभा में यूडीएफ के 47 सदस्य हैं, लेकिन उसके उम्मीदवार वी.पी.सजींद्रन को 46 वोट ही मिले।
ऐसा तब हुआ जब यूडीएफ ने अपने सभी 47 विधायकों को सजींद्रन के पक्ष में मतदान करने के लिए ह्विप जारी किया था।
इस पर शर्मिंदगी महसूस करने के बजाय चेन्निथला यह कहने में व्यस्त दिखे कि केरल में भाजपा और माकपा में गुप्त समझौता है।
चेन्निथला ने संवाददाताओं से कहा, “दो पार्टियों के बीच गठबंधन का यह अच्छा उदाहरण है। हमने स्पष्ट कर दिया था कि हमें राजगोपाल और पी.सी. जॉर्ज का वोट नहीं चाहिए।”
इस पर राजगोपाल ने कहा कि वह चेन्निथला की इच्छा का सम्मान करना चाहते थे।
उन्होंने कहा, “मैं चेन्निथला को नाखुश करना नहीं चाहता था। मैंने श्रीरामकृष्णन को वोट देने का फैसला किया, क्योंकि मैं उनकी शैली को पसंद करता हूं और वह मेरे पुराने मित्र हैं।”
पी.सी. जॉर्ज ने कहा कि वह किसी दल के नहीं हैं, इसलिए किसी को भी वोट नहीं दिया।
विधानसभा अध्यक्ष श्रीरामकृष्णन पहले छात्र संघ राजनीति से जुड़े थे। 2007 में वह डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया कि अध्यक्ष बने थे। 2011 में वह पहली बार विधायक चुने गए। विनम्र स्वभाव के श्रीरामकृष्णन विद्वान और अच्छे वक्ता हैं।
अध्यक्ष चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री पिनारई विजयन और नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथला उन्हें आसन तक ले गए।
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