दिल्ली उच्च न्यायालय में सुशील कुमार की याचिका खारिज (लीड-1-संशोधित)

नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को दो बार ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार की दोबारा ट्रायल की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालतन ने कहा कि चयन को अंतिम समय पर चुनौती दिए जाने से चयनित खिलाड़ी नरसिंह यादव की मानसिक तैयारी पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

सुशील कुमार ने याचिका दायर कर रियो ओलंपिक के लिए भारतीय दल में जगह पाने के लिए 74 किलोग्राम फ्री स्टाइल कुश्ती का ट्रायल फिर से कराने की मांग की थी।

न्यायमूर्ति मनमोहन ने भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) का निवेदन स्वीकार कर लिया। संघ ने कहा कि नरसिंह यादव का वर्तमान फॉर्म सुशील कुमार से अच्छा है।

न्यायमूर्ति ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि सुशील कुमार चयन के लिए 2014 और 2015 में हुए ट्रायल में भाग लेने में विफल रहे। साथ ही उन्होंने 31 दिसंबर 2015 और 1 जनवरी 2016 को हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता व फरवरी 2016 में एशियाई चैंपियनशिप में भी भाग नहीं लिया।

अदालत ने कहा कि सुशील कुमार ने सितम्बर 2014 से अब तक कोई भी राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता नहीं जीती है, जबकि नरसिंह यादव ने दिसंबर 2015 में प्रो कुश्ती लीग में मंगोलिया के पहलवान पुरवाज उनुरबात को हराया था और सितंबर 2015 में हुई विश्व चैंपियनशिप प्रतियोगिता में कांस्य पदक विजेता रहे थे।

सुशील कुमार की ओर से तर्क दिया गया कि प्रशिक्षण के लिए उन्हें 2016 में जॉर्जिया और सोनीपत (हरियाणा) भेजा गया था। इस पर अदालत ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि ट्रायल आज कराना आवश्यक है और वह भी इतनी देर से।

अदालत ने इस पर भी ध्यान दिया कि डब्ल्यूएफआई ने चयन से पहले निष्पक्ष और पारदर्शी ट्रायल कराया था। साथ ही खेल संहिता के तहत चयन प्रक्रिया और ट्रायल कराने के निर्णय के संबंध में भारतीय कुश्ती संघ को प्रदत्त स्वायत्तता को भी माना।

अदालत ने कहा, “एक खिलाड़ी की मासूमियत के साथ ‘सिर्फ एक ट्रायल’ की मांग से हो सकता है कि एक चयनित खिलाड़ी के जीतने की उम्मीद पर पानी फिर रहा हो और राष्ट्रीय हित पर घातक असर पड़ रहा हो। द्वंद्व युद्ध की मांग से देश को घाटा होगा।”

अदालत ने कहा कि प्रतियोगिता होने और याचिका दायर करने में बहुत कम समय का अंतर है। साथ ही ट्रायल में चोटिल होने की आशंका प्रबल है। इसलिए सुशील कुमार का निवेदन स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

अदालत ने कहा कि यह समझ में नहीं आ रहा कि क्यों सुशील कुमार ने नरसिंह यादव को मई, 2016 में द्वंद्व युद्ध के लिए चुनौती दी है जबकि ओलंपिक के आयोजन में सिर्फ ढाई महीने बचे हैं।

अदालत ने फर्जी हलफनामा दायर करने के लिए डब्ल्यूएफआई के उपाध्यक्ष राज सिंह के खिलाफ नोटिस भी जारी किया और पूछा कि झूठी गवाही देने के लिए क्यों नहीं उनके के खिलाफ कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए।

सुशील कुमार को 66 किलोग्राम श्रेणी में 2008 में बीजिंग ओलंपिक में कांस्य और 2012 में लंदन ओलंपिक में रजत पदक मिला था। लेकिन, अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती संघ ने 2014 में इस श्रेणी को समाप्त कर दिया।

इसी वजह से कुमार 74 किलोग्राम श्रेणी में शामिल होने के लिए प्रेरित हुए। इस श्रेणी में वह नरसिंह यादव के प्रतिद्वंद्वी बन गए। यादव तब तक इस श्रेणी के शीर्ष भारतीय पहलवान थे।

चोटिल होने के कारण सुशील कुमार (32) ने रियो ओलंपिक के लिए ट्रायल का अवसर खो दिया और देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए नरसिंह यादव को दल में जगह मिल गई।

कुश्ती ट्रायल फिर से कराने के लिए भारतीय कुश्ती संघ से बार-बार निवेदन करने के बाद कुमार ने उच्च न्यायालय से गुहार लगाई थी।

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