मथुरा, 8 जून (आईएएनएस)। मथुरा के जवाहरबाग में पिछले सप्ताह पुलिस व अतिक्रमणकारियों के बीच गोलीबारी की घटना के बाद भड़की हिंसा में हजारों पेड़ों को नुकसान पहुंचा और कई आग में जलकर खाक हो गए।
उत्तर प्रदेश बागबानी विभाग के अधिकारियों ने कहा कि आग में जले या नष्ट हुए पेड़ों की संख्या 5,000 से अधिक हो सकती है, जिनमें से अधिकांश फलदार वृक्ष थे।
मथुरा के पर्यावरणविदें ने हरियाली को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
‘बृज बचाओ’ समिति के सदस्यों ने कहा है कि 260 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले बाग के मालिक राज्य के बागबानी विभाग को अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन वह पर्यावरण को पहुंचे नुकसान की अनदेखी कर रहा है।
बागबानी विभाग के अधिकारियों ने हालांकि कहा है कि उन्होंने पुलिस में कई शिकायतें दर्ज कराई हैं और जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को बार-बार सूचित किया है।
एक अधिकारी ने कहा कि जवाहरबाग में जिन पेड़ों को नुकसान पहुंचा, वे हरे-भरे थे और जवाहरबाग को हरा-भरा बनाने में कई सालों की मेहनत लगी थी। अधिकारी ने कहा, “नुकसान की क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती और दोबारा हरियाली लाने में वर्षो लगेंगे।”
मथुरा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद हेमा मालिनी ने मई में एक ग्राम प्रधान को बंशी वात और मांट इलाके में पेड़ों की कटाई पर सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई थी।
आग से पेड़ों को पहुंचे नुकसान पर हेमा ने आईएएनएस से कहा, “पूरे राज्य एवं यमुना नदी पर हरियाली का नुकसान गंभीर चिंता का विषय है और सरकार एजेंसियों को असंतुलन की भरपाई के लिए जागना चाहिए।”
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