बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का जश्न मनाने के लिए स्मारक

अगरतला, 9 जून (आईएएनएस)। एक युद्ध संग्रहालय, टीला, हरीभरी घाटियां, झील, पौधे, मूर्तियां.. यह केवल एक पार्क नहीं है बल्कि इससे कुछ ज्यादा है। भारत-बांग्लादेश मैत्री उद्यान में आपका स्वागत है जिसे बांग्लादेश के 1971 के मुक्ति संग्राम की याद में चोट्टाखोला में 20 हेक्टेयर जमीन पर बनाया गया है।

अगरतला, 9 जून (आईएएनएस)। एक युद्ध संग्रहालय, टीला, हरीभरी घाटियां, झील, पौधे, मूर्तियां.. यह केवल एक पार्क नहीं है बल्कि इससे कुछ ज्यादा है। भारत-बांग्लादेश मैत्री उद्यान में आपका स्वागत है जिसे बांग्लादेश के 1971 के मुक्ति संग्राम की याद में चोट्टाखोला में 20 हेक्टेयर जमीन पर बनाया गया है।

त्रिपुरा सरकार द्वारा विकसित किया गया यह पार्क अगरतला से 130 किलोमीटर दक्षिण चोट्टाखोला में है, जो भारत-बांग्लादेश सीमा से महज तीन किलोमीटर दूर है। इसमें एक बड़ा वॉचटॉवर भी है जिससे बांग्लादेश का कोमिलिया, फेनी और नोआखली जिले दिखाई देते हैं।

त्रिपुरा विधानसभा के विधायक सुधान दास उन लोगों में से एक हैं जिन्होंने 2003 में इसकी कल्पना की थी।

दास ने आईएएनएस से कहा, “हमने सबसे पहले चोट्टाखोला में स्मारक बनाने के बारे में सोचा था जब हम 16 दिसंबर 2009 को विजय दिवस के गवाह बने। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने इस मुद्दे पर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ विचार-विमर्श किया, जब वे उनसे मार्च 2010 में ढाका में मिले थे। उसके बाद से इस परियोजना पर काम शुरू हुआ।”

माणिक सरकार ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें हसीना सरकार ने ढाका में स्वतंत्रता और राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेने के लिए विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था।

इस पार्क की आधारशिला नवंबर 2010 में बांग्लादेश की तत्कालीन विदेश मंत्री दिपू मोनी ने रखी थी।

दास ने कहा, “हमने इस पार्क की स्थापना के लिए केंद्र सरकार को 12 करोड़ रुपये की परियोजना का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन केंद्र ने कोई जवाब नहीं दिया। त्रिपुरा सरकार इस पार्क को विकसित करने पर अब तक 4 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।”

दास के मुताबिक अगले तीन महीनों में यह पार्क आगंतुकों के लिए तैयार हो जाएगा। इस पार्क में त्रिपुरा और बांग्लादेश के जाने-माने कलाकारों की बनाई हुई मूतियां और पेंटिंग लगाई गई हैं, इससे इस स्मारक का आकर्षण और बढ़ा है।

इस पार्क में एक संग्रहालय भी स्थापित किया जा रहा है। इसमें मुक्ति संग्राम के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियार और गोला-बारूद को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही कई दुर्लभ चित्र और युद्ध से जुड़े साहित्य को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इस पार्क में पौधों की 220 अलग-अलग प्रजातियां लगाई गई हैं।

इस समूची परियोजना का क्रियान्वयन त्रिपुरा सरकार के वन, ग्रामीण विकास, लोक निर्माण विभाग, बागवानी विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, जल संसाधन और बिजली विभाग ने मिलकर किया है।

बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम मामलों के मंत्री ए.के.एम. मोजाम्मेल हक ने बताया, “हम इस पार्क और संग्रहालय के निर्माण के लिए त्रिपुरा सरकार के आभारी हैं। हम उन भारतीय सैनिकों के प्रति आभारी हैं जिन्होंने हमारे देश की मुक्ति की लड़ाई लड़ी और अपने जीवन का बलिदान दिया। हमारी सरकार ने उन्हें सम्मानित करने के लिए भारत भर में आठ स्थानों पर समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया है।”

त्रिपुरा के स्वास्थ्य एवं लोक निर्माण मंत्री बादल चौधरी ने कहा, “हमने कई साल पहले तत्कालीन रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ स्मारक बनाने की चर्चा की थी।”

राज्य में स्मारक के निर्माण के निर्णय को न्यायोचित ठहराते हुए चौधरी ने कहा, “त्रिपुरा ने ना केवल विस्थापित लोगों को समायोजित किया, बल्कि उन्हें हर तरह की मदद मुहैया कराई और स्वतंत्रता सेनानियों की मदद की। सीमावर्ती शहर बेलोनिया पर पाकिस्तानी सैनिकों ने हमला किया था।”

राजनीतिक विश्लेषक और लेखक गौतम दास, जिन्होंने मुक्ति संग्राम को करीब से देखा है, ने आईएएनएस को बताया, “उस समय के पूर्वी पाकिस्तान के करीब 1,60,000 विस्थापित लोगों ने त्रिपुरा में शरण ली थी। हमारे राज्य में चार सेक्टरों में कई शिविर थे जहां पाकिस्तानी सैनिकों से युद्ध करनेवाले स्वतंत्रता सेनानियों ने 1971 में चले 9 महीने लंबे युद्ध के दौरान शरण ली थी।”

वे प्रचंड दिन अब बीत चुके हैं, लेकिन त्रिपुरा के लोग इस बात को समझते हैं कि उन स्वतंत्रता सेनानियों और भारतीय सैनिकों की अदम्य भावना का जश्न मनाने की जरूरत है, जिन्होंने अपनी पीड़ित भूमि को आजाद करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया। यह स्मारक निश्चित रूप से सुनिश्चित करेगा कि इसे कभी भुलाया नहीं गया।

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