रांची, 10 जून (आईएएनएस)। झारखंड में विपक्ष सत्ताधारी भाजपा को अपना संयुक्त मोर्चा दिखाने को तैयार है। विपक्षी दल शनिवार से अधिवास नीति के खिलाफ राज्य में दो दिनों के लिए आर्थिक नाकेबंदी शुरू करेंगे और राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव में एकजुटता दिखाएंगे।
विपक्षी दलों का आरोप है कि ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के साथ मिलकर सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जनजातियों और मूलनिवासियों की आवाज को कुचल रही है और उनसे विरोध करने का अधिकार भी छीन रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखदेव भगत ने कहा, “हमें राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करनी है। हम राज्य के लोगों की आवाज को कुचलने की अनुमति नहीं दे सकते हैं।”
भाजपा पर विपक्षी विधायकों की मुट्ठी गरम करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है। भाजपा ने झारखंड से दो राज्यसभा सीटों के लिए दो उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि उसके पास केवल एक प्रत्याशी को जिताने लायक ही आवश्यक मत हैं। राज्यसभा सीटों के लिए शनिवार को चुनाव होने वाले हैं।
झारखंड मुक्ति मोर्चा(झामुमो) के नेता हेमंत सोरेन के नेतृत्व में विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राज्य की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और उन्हें अधिवास नीति एवं राज्यसभा चुनावों पर अपने पक्ष से अवगत कराया।
उधर, शनिवार से शुरू होने वाली दो दिवसीय आर्थिक नाकेबंदी से निपटने के लिए प्रदेश की रघुवर दास सरकार ने बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए हैं। बंद का आह्वान बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो -पी) ने अधिवास नीति के विरोध में किया है।
आर्थिक नाकेबंदी का समर्थन झामुमो, कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने किया है। इन पार्टियों का कहना है कि अधिवास नीति प्रदेश की जनजातियों और मूलनिवासियों के हितों के खिलाफ है।
ऐसी आशंका जताई जा रही है कि अपनी मांगों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए विपक्षी दलों के कार्यकर्ता शनिवार को मुख्य सड़कों, रेलपटरियों और बड़े खदानों को बंद करेंगे।
अधिवास नीति के खिलाफ गत 14 मई को आयोजित बंद के दौरान सरकार ने कड़े कदम उठाए थे। दस विधायकों समेत 9000 लोग गिरफ्तार किए गए थे।
इस बार भी प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पुलिस मॉक ड्रिल कर रही है। रेलवे, राजमार्गो तथा महत्वपूर्ण जगहों की सुरक्षा के लिए अलर्ट जारी किए हैं।
प्रदर्शनों की वीडियोग्राफी की जाएगी और ड्रोन से सर्वेक्षण किया जाएगा।
विपक्षी पार्टियों ने राज्यसभा चुनाव के लिए रणनीति तय करने के लिए भी बैठक की है।
झारखंड से दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में हैं जिनमें मुख्तार अब्बास नकवी और महेश पोद्दार भाजपा के और बसंत सोरेन झामुमो के हैं। यही वजह है कि प्रत्येक विधायक के मत के लिए कड़ा संघर्ष हो रहा है।
राज्यसभा चुनावों के लिए मतदान में झारखंड के विधायकों का रिकार्ड अच्छा नहीं रहा है। दो राज्यसभा चुनावों में हुए खरीद फरोख्त की जांच सीबीआई अब भी कर रही है।
झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने बड़े अंतर से अपनी पार्टी के उम्मीदवार की जीत का दावा किया है। हेमंत सोरेन बसंत के भाई भी हैं।
झारखंड विधानसभा में 81 सदस्य हैं और एक उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 28 मतों की जरूरत है।
भाजपा और घटक आजसू को मिलाकर 47 मत हैं और उसने दो अन्य विधायक भानु प्रताप शाही और गीता कोड़ा का समर्थन भी जुटाए हैं।
इसका अर्थ है कि नकवी चुनाव जीत जाएंगे, लेकिन पोद्दार के लिए 21 विधायक ही बचेंगे।
उधर, विपक्षी उम्मीदवार के पास झामुमो के 19, कांग्रेस के 7 और झाविमो(पी) के दो विधायक हैं और उसे मार्क्सवादी समन्वय समिति और भाकपा (माले) के एक-एक विधायक का भी समर्थन प्राप्त है।
राज्यसभा की दोनों सीटें जीतने के लिए भाजपा को विपक्षी विधायकों का शिकार करना होगा। इस तरह के प्रयासों को लेकर कांग्रेस और झामुमो दोनों पार्टियां सावधान हैं और अपने विधायकों को दूसरे खेमे में जाने से रोकने के लिए हर संभव कोशिश कर रही हैं।
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