श्रीनगर, 12 जून (आईएएनएस)। उत्तर कश्मीर के गांदेरबल जिले में रविवार को सैंकड़ों कश्मीरी पंडितों ने तुल्लामुल्ला या खीर भवानी मंदिर में हिंदू देवी माता रगनया की पूजा-अर्चना की।
कश्मीरी पंडितों ने शनिवार शाम से विभिन्न वाहनों के जरिए तुल्लामुल्ला नगर पहुंचना शुरू किया, जिनमें से अधिकांश कश्मीरी पंडित प्रवासी थे। तुल्लामुल्ला मंदिर श्रीनगर से 24 किलोमीटर दूर है।
स्थानीय लोग रगनया देवी को माता खीर भवानी कहते हैं। वार्षिक माता खीर भवानी पर्व हर साल मनाया जाता है।
1990 के दशक में अलगावादी हिंसा के चलते कश्मीर घाटी से पलायन के बावजूद पंडित समुदाय के लोगों ने तुल्लामुल्ला मंदिर में पूजा-अर्चना करने की परंपरा नहीं छोड़ी है।
हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, देवी रगनया रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर उसके समक्ष प्रकट हुई थीं।
रावण ने श्रीलंका में देवी की एक प्रतिमा स्थापित की थी, लेकिन रावण के जीवन के अनैतिक तरीकों से क्रुद्ध देवी ने हुनमान को उनका आसन वहां से कश्मीर स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
बच्चों, महिलाओं व पुरुषों सहित करीब 13,000 प्रवासी पंडित देवी को खीर व फूल चढ़ाने के लिए रविवार दोपहर मंदिर पहुंचे।
सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रखते हुए नगर में रहने वाले मुस्लिमों ने श्रद्धालुओं का सत्कार किया।
कुछ मुस्लिमों ने श्रद्धालुओं को दूध की पेशकश भी की, जिसे पंडित समुदाय के लोगों ने खुशी-खुशी ले लिया।
सुबह में जम्मू एवं कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी मंदिर आईं। महबूबा के साथ प्रोफेसर अमिताभ मट्टू भी थे, जो मुख्यमंत्री के सलाहकार हैं।
प्रवासी पंडितों के एक समूह ने उनके पलायन व उनके कश्मीर घाटी लौटने का विरोध के लिए अलगाववादियों को जिम्मेदार ठहराते हुए नारेबाजी की।
उन्होंने मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों पर पंडित समुदाय की समस्याओं के प्रति गैर-गंभीर रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया।
मूलरूप से श्रीनगर शहर के हब्बा कादल इलाके के रहने वाले प्रवासी राज कुमार बमजई (46) ने शुक्रवार को अनंतनाग जिले में हुई पत्थरबाजी की एक घटना के विरोध में प्रदर्शनकारियों के एक ऐसे समूह की अगुवाई की, जो नारेबाजी कर रहा था। बस से तुल्लामुल्ला मंदिर जा रही दो महिलाएं पत्थरबाजी की घटना में घायल हो गईं।
बमजई ने आईएएनएस को बताया, “सरकार कभी कहती है कि यह हमें अलग कालोनियां देगी और कभी कहती है कि हमें हमारी पुश्तैनी जगहों पर बसाया जाएगा।”
उन्होंने कहा, “ये सब राजनीतिक बातें हैं, क्योंकि जो कोई भी सरकार का प्रमुख होता है, उसके लिए पंडित समुदाय महज एक राजनीतिक हथियार है। कोई हमारी समस्याओं का संज्ञान नहीं लेना चाहता।”
बमजई ने कहा, “हम हमारा खुले दिल से स्वागत करने के लिए तुल्लामुल्ला के मुस्लमानों के शुक्रगुजार हैं।”
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