अगरतला, 14 जून (आईएएनएस)। त्रिपुरा स्वैच्छिक रक्तदान के मामले में पिछले आठ सालों से लगातार सभी राज्यों की तुलना में आगे हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बादल चौधरी ने यहां मंगलवार को यह जानकारी दी।
विश्व रक्तदान दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “पिछले वित्त वर्ष (2015-16) में जितने रक्त की जरूरत थी, उसमें से 97 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान के माध्यम से इकट्ठा किया गया। हमारा लक्ष्य इसे सौ फीसदी तक लाने का है।”
“अगर हम स्वच्छ रक्त का उपयोग करें तो हम संक्रामक बीमारियों से बच सकते हैं। इससे कई अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता है।”
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्थान (नाको) के मुताबिक, केवल छह राज्यों -त्रिपुरा, तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और हरियाणा- में स्वैच्छिक रक्तदान के माध्यम से 90 फीसदी रक्त इकट्ठा किया गया, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 60 फीसदी है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने भी रक्तदान किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद छह बार रक्तदान किया है। राज्य में पिछले वित्त वर्ष में 765 रक्तदान शिविरों में कुल 29,000 लोगों ने रक्तदान किया, जिनमें बड़ी संख्या सुरक्षाकर्मियों और महिलाओं की थी।
उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में स्वैच्छिक रक्तदान एक उत्सव का रूप ले चुका है। उन्होंने नौजवानों और महिलाओं से आगे बढ़कर रक्तदान की अपील की, ताकि अनमोल जिन्दगियां बचाई जा सकें।
सरकार ने कहा कि त्रिपुरा ब्लड ट्रांसफ्यूजन कौंसिल का लक्ष्य वर्तमान वित्त वर्ष में 35,000 लोगों से स्वैच्छिक रक्तदान करवाना है।
उन्होंने कहा, “राज्य की आबादी की अगर पांच फीसदी भी स्वैच्छिक रूप से रक्तदान करती है, तो स्वैच्छिक रक्तदान के मामले में न सिर्फ भारत में नंबर एक हो जाएंगे, बल्कि रक्त की कमी वाले राज्यों को आपूर्ति भी कर पाएंगे।”
उन्होंने ध्यान दिलाया कि 2006 से अबतक “करीब 70 जोड़ी आंखें लोग स्वैच्छिक रूप से दान कर चुके हैं, जिससे कई लोगों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया है और अब वे भी इस दुनिया को देख सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि त्रिपुरा स्वैच्छिक नेत्रदान में भी देश में नंबर वन बनना चाहता है।
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