सभा में कथाकार नरसिंह नारायण, चित्रेश, जयंत त्रिपाठी, यतींद्र प्रताप शाही, डॉ. शिव भूषण मिश्र, डॉ. ओंकारनाथ द्विवेदी, डॉ. करुणेश भट्ट, साक्षी शुक्ला, संगीता शुक्ला, करुणा शंकर तिवारी, संदीप सिंह, अवनीश कुमार त्रिपाठी, अजय त्रिपाठी, प्रिया मिश्रा, राकेश कसौधन ने श्रद्धांजलि देते हुए मुद्राराक्षस को यथार्थवादी रचनाकार बताया।
‘कथा समवेत’ के संपादक डॉ. शोभनाथ शुक्ल ने मुद्राराक्षस को दलित विमर्श का सूत्रधार बताते हुए उन्हें एक सफल कहानीकार व उपन्यासकार बताया।
शुक्ल ने कहा कि अपनी लंबी रचनात्मक उम्र को उन्होंने मीडिया में सुर्खियों में बिताया, नाटक के क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। रेडियो, टीवी व अखबारों से जुड़ाव रखना उनके स्वभाव का हिस्सा था। अल्पसंख्यक मामलों को बहस के केंद्र में लाने तथा हिंदी में विभिन्न विधाओं को दर्जनों पुस्तकों देने वाले मुद्राराक्षस का निधन हिंदी साहित्य लेखन में बहस-मुबाहिसा की प्रवृत्ति को खासा धक्का लगा है।
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