काबुल : आत्मघाती हमले में 14 नेपाली मरे, तालिबान,आईएस ने ली जिम्मेदारी (राउंडअप)

काबुल/काठमांडू, 20 जून (आईएएनएस)। अफगानिस्तानकी राजधानी काबुल में सोमवार को एक मिनी बस पर हुए आत्मघाती हमले में कनाडा के दूतावास की सुरक्षा में तैनात नेपाल के 14 नागरिकों की मौत हो गई और नौ अन्य घायल हो गए।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय ने कहा कि एक आत्मघाती हमलावर ने बनाही क्षेत्र में पुल-ए-चरखी मार्ग पर सुबह लगभग 5.40 बजे एक बस को निशाना बनाया, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई। हमले में नेपाल के पांच और अफगानिस्तान के चार सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं।

इस हमले में हमलावर की घटनास्थल पर ही मौत हो गई और विस्फोट में कई असैन्य वाहन और पास की दुकानें भी क्षतिग्रस्त हो गईं।

तालिबान और इस्लामिक स्टेट (आईएस), दोनों आतंकवादी संगठनों ने हमले की जिम्मेदारी ली है।

तालिबान के कथित प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली और कहा कि इसमें 20 लोग मारे गए हैं और तालिबान के लड़ाकों ने इस घटना को अंजाम दिया है।

इस घटना की अफगानिस्तान, नेपाल, भारत और पाकिस्तान ने निंदा की है।

सरकार के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब्दुल्ला अब्दुल्ला और अफगान आंतरिक मंत्रालय ने इस हमले की निंदा की।

अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा, “मैं काबुल में अपने कार्यस्थल पर जा रहे लोगों पर आतंकवादी हमले की निंदा करता हूं। यह हमला आतंक और धमकी का कृत्य है।”

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी काबुल में हुइस भयावह हमले की निंदा की है और अफगानिस्तान एवं नेपाल के लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की है।

नेपाल ने इस घटना को दुखद आघात बताया है।

नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली ने हमले की निंदा करते हुए इसमें नेपाली नागरिकों की मौत पर दुख जताया।

ओली ने एक बयान में कहा, “मैं यह सुनकर सदमे में हूं कि अफगानिस्तान में आत्मघाती हमले में नेपाल के 14 नागरिकों की जान चली गई। मैं मृतकों के परिवार वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं।”

ओली ने कहा, “नेपाल सरकार काबुल में इस जघन्य अपराध की निंदा करती है। मैं इस घटना में घायल होने वालों के जल्द ठीक होने की कामना करता हूं।”

उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री कमल थापा ने भी हमले की निंदा की।

विदेश मंत्री ने कहा कि वह मृतकों और घायलों के बारे में अधिक जानकारी जुटा रहे हैं।

अफगानिस्तान में नेपाल का दूतावास नहीं है। पाकिस्तान स्थित इसका उच्चायोग ही देश के अफगान मामलों से संबंधित काम भी देखता है।

वहीं, नाटो के नेतृत्व वाले रीजोल्यूट सपोर्ट मिशन ने कहा, “तालिबानी आतंकवादी बार-बार सरकार को कमजोर करने के प्रयास में नागरिकों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।”

गौरतलब है कि अप्रैल की शुरुआत से ही तालिबान द्वारा हमलों में तेजी आई है। अब तक विभिन्न स्थानों पर तालिबान के हमले में हजारों लोगों की जान गई है जिसमें लड़ाके, सुरक्षाकर्मी और नागरिक शामिल हैं।

तालिबान ने आम नागरिकों से आधिकारिक कार्यक्रमों, सैन्य दस्तों और केंद्रों आदि से दूर रहने की अपील की है, क्योंकि वे इन जगहों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने लोगों को सरकार की मदद नहीं करने की चेतावनी भी दी है।

अफगानिस्तान में तालिबान ने 2001 से विद्रोह छेड़ रखा है। नाटो ने अफगानिस्तान में अपना मिशन दिसंबर 2014 में खत्म कर दिया है, लेकिन अभी भी वहां 13,000 प्रशिक्षु और आतंकरोधी सैनिक मौजूद हैं।

तालिबान ने अफगानिस्तान सरकार के साथ शांतिवार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है कहा है कि जब तक विदेशी सैनिक देश छोड़ कर नहीं जाते, वे अपने हमले जारी रखेंगे।

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