वाशिंगटन, 21 जून (आईएएनएस)। चीन परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की भारत की सदस्यता को लेकर अड़ियल रुख अपनाए हुए है। इस बीच अमेरिका ने कहा है कि वह 48 सदस्यीय इस समूह से सियोल में इस हफ्ते होने वाली बैठक में भारत की सदस्यता के आवेदन का समर्थन करने का आग्रह करता रहेगा।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता जॉन किर्बी भारत की सदस्यता को लेकर चीन के रुख के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने फिर पुष्टि की है कि भारत एनएसजी की सदस्यता के काबिल है।
किर्बी ने कहा, “हम एनएसजी में शामिल सरकारों से पूर्ण अधिवेशन में भारत के आवेदन का समर्थन करने का आग्रह करते रहेंगे।”
उन्होंने कहा कि इस माह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाशिंगटन दौरे के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एनएसजी में शामिल होने के लिए भारत के आवेदन का स्वागत किया था और इस बात की फिर पुष्टि की थी कि भारत सदस्यता की योग्यता रखता है।
उन्होंने कहा, “और हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।”
यह पूछने पर कि क्या अमेरिका के पास कोई ऐसा अवसर है कि चीन से एनएसजी के मुद्दे को उठा सके। इसके जवाब में किर्बी ने कहा, “भारत का आवेदन ऐसा मुद्दा है जिस पर हम नियमित रूप से एनएसजी के अन्य प्रतिभागी सदस्यों से सामान्यतया बात करते रहते हैं। यह चर्चा का कोई नया मुद्दा नहीं है जिस पर हमें निजी तौर पर सदस्यों से बात करनी है।”
चीन ने सोमवार को कहा कि एनएसजी भारत को शामिल करने को लेकर बंटा हुआ है और सदस्यता के लिए भारत का आवेदन 23-24 जून के पूर्ण अधिवेशन के एजेंडे में शामिल नहीं है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा, “एनएसजी अब भी परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देशों के एनएसजी में प्रवेश को लेकर बंटा हुआ है और मौजूदा परिस्थितियों में हम उम्मीद करते हैं कि विस्तार से चर्चा के बाद एनएसजी आपसी विचार-विमर्श पर आधारित कोई निर्णय करेगा।”
मंत्रालय ने कहा, “गैर एनटीपी सदस्यों को शामिल करने का विषय कभी भी एनटीपी की बैठक का एजेंडा नहीं रहा है। इस साल सियोल में इस तरह का कोई विषय नहीं है।”
परमाणु सामग्री के व्यापार करने वाले इस वैश्विक समूह में भारत की सदस्यता का इस आधार पर चीन विरोध करता है कि भारत ने एनटीपी पर हस्ताक्षर नहीं किया है। चीन का यह भी कहना है कि यदि भारत को शामिल किया जाता है तो उसके अत्यंत करीबी मित्र देश पाकिस्तान को भी शामिल किया जाए।
भारत एनटीपी को भेदभावपूर्ण मानता है। भारत को अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, इटली, मेक्सिको, स्विट्जरलैंड का समर्थन है, जबकि न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका ने भारत की एनएसजी सदस्यता का विरोध किया है।
dharmpath.com dharmpath