लंदन, 24 जून (आईएएनएस)। ब्रिटेन के मतदाताओं ने गुरुवार हुए ऐतिहासिक जनमत संग्रह में यूरोपीय संघ से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद शुक्रवार से इस घटनाक्रम पर दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।
यूरोपीय संसद के अध्यक्ष मार्टिन शुल्ज ने जनमत संग्रह के परिणामों की घोषणा के बाद शुक्रवार सुबह कहा, “हम परिणाम का सम्मान करते हैं। अब हमें गंभीरता और जिम्मेदारी से काम करने की जरूरत है। (प्रधानमंत्री) डेविड कैमरन की अपने देश के प्रति जिम्मेदारियां हैं। हमारी यूरोपीय संघ के भविष्य के प्रति जिम्मेदारी है। आप देख सकते हैं कि बाजार में स्टर्लिग के साथ क्या हो रहा है। मैं नहीं चाहता कि यह स्थिति यूरो के साथ भी हो।”
नीदरलैंड के फ्रीडम पार्टी के नेता गीर्ट विलर्ड्स ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि अब नीदरलैंड में भी जनमत संग्रह कराने का वक्त आ गया है।
उन्होंने ट्वीट किया, “ब्रिटिश को बधाई! अब हमारी बारी है। अब डच जनमत संग्रह कराने का वक्त आ गया है।”
फ्रांस के अति दक्षिणपंथी नेशनल फ्रंट पार्टी की नेता मेरिन ले पेन ने जनमत संग्रह के परिणाम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वह ऐसा ही जनमत संग्रह फ्रांस में भी चाहती हैं।
उन्होंने ट्वीट कर कहा, “अब ब्रेक्सिट के बाद फ्रेक्सिट की बारी है। अब हमारे देश के लिए भी लोकतंत्र आयात करने का समय है। फ्रांस को भी चयन का अधिकार होना चाहिए।”
यूरोपीय संसद के सबसे बड़े समूह ईपीपी के नेता मैनफ्रेड वेबर ने कहा, “बाहर निकलने की वार्ता अधिकतम दो साल में पूरी कर लेनी चाहिए। यहां किसी विशेष बरताव की जरूरत नहीं है। छोड़ना मतलब छोड़ना है।”
जर्मनी के विदेश मंत्री फ्रैंक वॉल्टर स्टीनमीयर ने इसे ब्रिटेन और ईयू दोनों के लिए दुखद दिन बताया है।
जर्मनी के फॉरेन ट्रेड एसोसिएशन के प्रमुख एंटन बोर्नर ने कहा, “यह ब्रिटेन के लिए एक भयावह परिणाम है, साथ ही यूरोप और जर्मनी के लिए भी। खासतौर से जर्मनी की अर्थव्यवस्था के लिए। यह परेशान करनेवाला है कि दुनिया की सबसे पुरानी लोकतंत्र ने हमें पीठ दिखा दिया है।”
वाशिगटन में फ्रांस के उच्चाधिकारी गेरार्ड एरॉड ने ट्वीट किया, “अब यह दूसरे सदस्य देशों की जिम्मेदारी है कि वे ईयू को विघटन से बचाएं, जिसमें व्यापार सामान्य रूप से शामिल नहीं है, खासतौर से ब्रसेल्स में। सुधार करो या नष्ट हो जाओ।”
ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने पर हुए मतदान में 52 फीसदी लोगों ने इसके पक्ष में मत दिया, जबकि 48 फीसदी लोगों ने, जिसमें इंग्लैंड और वेल्स के निवासी भी शामिल थे, ने ब्रेक्सिट का विरोध किया। वहीं, लंदन, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड ने यूरोपीय संघ में बने रहने का फैसला किया है।
यह जनमत संग्रह देश भर में गुरुवार को कराया गया। इसमें कुल 71.8 फीसदी मतदाताओं ने भाग लिया और तीन करोड़ से ज्यादा लोगों ने मतदान किया।
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