बेंगलुरू, 24 जून (आईएएनएस)। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ (ईयू) से बाहर होने (ब्रेक्सिट) से निकट भविष्य में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र प्रभावित होगा। यह बात शुक्रवार को एक प्रमुख उद्योग संघ ने कही।
नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसिस कंपनीज (नैसकॉम) के अध्यक्ष आर. चंद्रशेखर ने नई दिल्ली से फोन पर आईएएनएस से कहा, “मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव, बाजार में अनिश्चितता और यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने की शर्तो के कारण निश्चित रूप से छोटी अवधि में ब्रेक्सिट का प्रभाव नकारात्मक रहेगा।”
ब्रिटेन में गुरुवार को हुए जनमत संग्रह में देश की आम जनता ने ब्रेक्सिट के पक्ष में मतदान किया।
चंद्रशेखर ने कहा, “यूरोप भारत के लिए काफी महत्व रखता है। यह इस उद्योग के लिए सिर्फ दूसरा सबसे बड़ा बाजार ही नहीं है, बल्कि सॉफ्टवेयर निर्यात आय में यह करीब 30 फीसदी योगदान भी करता है, जो 100 अरब डॉलर के बराबर है।”
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में भारतीय उद्योगों के यूरोप में निवेश के लिए ब्रिटेन एक दरवाजे के रूप में काम कर रहा था और ब्रिटिश मुद्रा पाउंड स्टर्लिग के अवमूल्यन से पुराने सौदे कम आकर्षक रह जाएंगे और उस पर फिर से बात करनी होगी।
उन्होंने कहा, “यूरोपीय संघ से बाहर होने की शर्तो और/या भविष्य में ईयू के साथ संबंधों से बड़ी परियोजनाओं से संबंधित निर्णय प्रभावित होंगे।”
ब्रेक्सिट के कारण भारतीय आउटसोर्सिग कंपनियों को ईयू में भी अलग कार्यालय स्थापित करने होंगे।
चंद्रशेखर ने कहा, “ब्रसेल्स और लंदन के नीति निर्माताओं को अगले कदम पर अधिकाधिक स्पष्टता लानी चाहिए, ताकि हमारी कंपनियां ब्रिटेन में बनी रहने या वहां से विनिवेश करने पर स्पष्टता से फैसला ले सकें।”
उन्होंने हालांकि कहा कि जहां तक दूरगामी प्रभाव की बात है, तो ईयू से अलग होने पर ब्रिटेन के नए आर्थिक संबंध की तलाश के कारण भारत जैसे दक्ष पेशेवरों वाले देशों को लंबे समय में लाभ मिल सकता है।
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