नई दिल्ली, 5 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने हाल ही में दिल्ली से ‘दानिक्स’ (दिल्ली, अंडमान निकोबार द्वीप सिविल सेवा) के आठ अफसरों के तबादलों को लेकर मंगलवार को केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार दिल्ली में समानांतर सरकार चलाना चाहती है।
सिसोदिया ने कहा, “केंद्र सरकार दिल्ली की निर्वाचित सरकार की उपेक्षा कर अलोकतांत्रिक तरीके से समानांतर सरकार चलाना चाहती है। मोदीजी दावा करते हैं कि वह संघवाद में भरोसा करते हैं। लेकिन क्या इस प्रकार राज्य सरकार को कमजोर करके और मुख्यमंत्री के कार्यालय पर छापा मरवा कर आप संघीय सरकार चलाते हैं।”
सिसोदिया ने आरोप लगाया कि केंद्र दानिक्स के अधिकारियों के अन्य जगह तबादले करके दिल्ली सरकार को कमजोर करना चाहती है।
उन्होंने कहा, “दिल्ली सरकार को अधिकारी प्रदान करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रही है, क्योंकि वह हमारे अधिकारियों को ले जाकर दिल्ली सरकार को कमजोर करना चाहती है।”
सिसोदिया ने कहा, “भारतीय राजपत्र अधिसूचना के मुताबिक, दिल्ली को कम से कम 309 अधिकारी मिलने चाहिए। हालांकि नवीनतम तबादले के बाद हमारे पास केवल 157 अधिकारी ही बचे हैं, जबकि अंडमान निकोबार द्वीपों में अधिकारियों के केवल 24 पद हैं और वहां 31 अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।”
उन्होंने इसे केंद्र सरकार की ‘साजिश’ बताते हुए कहा, “केंद्र सरकार दिल्ली सरकार के लिए अच्छा काम करने वाले अधिकारियों को धमकाना चाहती है। वह अधिकारियों को यह संदेश देना चाहती है कि अगर आप दिल्ली के लिए अच्छा काम करेंगे तो अंडमान या लक्षद्वीप में आपका तबादला कर दिया जाएगा या आपको जेल भेज दिया जाएगा।”
दिल्ली के पूर्व ‘वैट’ आयुक्त विजय कुमार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “विजय कुमार बेहद अच्छा काम कर रहे थे। लेकिन दीवाली से थोड़े समय पहले ही उनका तबादला लक्षद्वीप कर दिया गया, जिस समय दिल्ली में सबसे ज्यादा वैट की वसूली होती है। हमने गृह मंत्रालय से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने यह कहकर इंकार कर दिया कि लक्षद्वीप को उनकी सेवाओं की जरूरत है।”
सिसोदिया ने कहा कि छह महीने के बाद फिर से उनका तबादला दिल्ली के उप राज्यपाल के मुख्य सचिव के रूप में कर दिया गया।
सिसोदिया ने सवाल किया, “छह महीने में क्या बदल गया जो उन्हें दिल्ली वापस बुला लिया गया, वह भी राज्य सरकार से विचार-विमर्श किए बिना।”
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