नई दिल्ली, 5 जुलाई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को फरवरी, 2011 के एक मामले में फसला सुनाते हुए रेल दुर्घटना में मारे गए 15 लोगों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया।
यह रेल दुर्घटना उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में हुई थी।
प्रधान न्यायाधीश टी.एस. ठाकुर और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित के नेतृत्व में सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने दुर्घटना के कारण स्थायी रूप से विकलांग को 15-15 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों 75 -75 हजार रुपये और अन्य तरह से घायलों को 35-35 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में देने के भी आदेश दिए।
साल 2011 में 1 फरवरी को यह दुर्घटना तब हुई थी, जब मृतक और घायल राज्य के बरेली स्थित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की भर्ती शिविर से लौट रहे थे।
फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि थति के लिए रेलवे को निर्देश दिए गए हैं।
शाहजहांपुर के निकट एक ओवरब्रिज के नीचे से होकर ट्रेन के गुजरते समय छत पर सवार 14 लोगों के ओवरब्रिज से टकराने की वजह से मौत हो गई थी।
ओवरब्रिज से टकराने के बाद हिमगिरी एक्सप्रेस की छत पर चढ़कर यात्रा कर रहे 14 युवकों की मौत हो गई थी और उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में त्रिवेणी एक्सप्रेस से गिरने से एक युवक की मौत हुई थी।
अदालत ने अनिल कुमार गुप्ता की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने यह आदेश दिया।
अदालत ने सुनवाई के दौरान रेलवे से कहा कि वह रेलवे सुरक्षा आयुक्त की रिपोर्ट में उल्लिखित लखनऊ डिवीजन में सभी फुटओवर ब्रिज की बाधाओं को हटाए। घटना के संबंध में रिपोर्ट सितंबर, 2009 में पेश की गई थी।
खंडपीठ ने रेलवे से अन्य डिवीजनों में भी इस तरह के सड़क या फुटओवर ब्रिज की बाधाओं को हटाने के संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी।
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