इंफाल, 9 जुलाई (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री इकराम इबोबी सिंह के कार्यालय में शनिवार को हुई सर्वदलीय बैठक में विधानसभा के आगामी सत्र में फिर से प्रवासी-रोधी विधेयक पेश करने का संकल्प लिया गया।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 11 मई को प्रोटेक्शन ऑफ मणिपुर पीपुल बिल-2015 को रोक दिया था और दो अन्य विधेयकों (मणिपुर भू-राजस्व एवं भूमि सुधार (संशोधन) विधेयक-2015 तथा मणिपुर दुकान एवं प्रतिष्ठान (संशोधन) विधेयक-2015) को फिर से विचार के लिए वापस भेज दिया था।
राष्ट्रपति के निर्णय के बारे में मुख्यमंत्री इबोबी सिंह को बता दिया गया था, लेकिन उन्होंने सात जून तक इसकी घोषणा नहीं की और राज्य से सभी दलों के नेताओं ने दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर इस मामले पर चर्चा की।
इस बैठक में निर्णय लिया गया कि कानून एवं संविधान विशेषज्ञ दोनों विधेयकों का पुनरीक्षण करेंगे। इसके अलावा तीसरे विधेयक का नाम बदलकर मणिपुर स्थानीय निवासी संरक्षण विधेयक-2016 किए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया। राष्ट्रपति ने जिस विधेयक को रोक दिया था, उसमें आधार वर्ष 1951 को रखा गया था, जबकि बदले गए नाम वाले विधेयक में इसे 1972 कर दिया जाएगा।
राज्य में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सचिव ए. नारा ने कहा, “जनजातियों ने तीनों विधेयकों का विरोध किया है। केंद्र सरकार इन विधेयकों को कभी भी मंजूरी नहीं देगी, क्योंकि राज्य की जनता के बीच इन्हें लेकर मतभेद है। पेश किया जाने वाला नया विधेयक समाज के सभी वर्गो में स्वीकार्य होना चाहिए।”
मणिपुर विधानसभा में 31 अगस्त, 2015 को ये तीनों विधेयक पारित हो चुके हैं।
राजधानी इंफाल में विधेयकों के समर्थक एक छात्र की हत्या हो गई, जबकि चूड़ाचांदपुर जिले में विधेयकों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे जनजातीय समुदाय के नौ लोगों की मौत हो गई।
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