नई दिल्ली, 12 जुलाई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति ने मंगलवार को कहा कि कोयला घोटाले की जांच के दौरान सीबीआई प्रमुख रहे रंजीत सिन्हा के सरकारी आवास की आगंतुक पुस्तिका असली है और कोयला खदान आवंटन घोटाले के अभियुक्तों के साथ उनकी बैठक ने प्रथम दृष्ट्या कुछ मामलों की जांच के परिणाम को प्रभावित किया है।
सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक एम.एल. शर्मा की रपट पर आगे कौन-से कदम उठाए जाने हैं, इस बारे में अपना आदेश सुरक्षित करते हुए न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी की पीठ ने कहा कि रपट की प्रति सभी पक्षों को उनकी टिप्पणी के लिए दी जा सकती है।
हालांकि, याचिका दायर करने वाली स्वयंसेवी संस्था कॉमन कॉज के वकील प्रशांत भूषण ने अदालत से प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आग्रह किया। उन्होंने इस मामले की जांच सीबीआई को करने का पक्ष नहीं लिया, क्योंकि वह इसे अपने द्वारा किए गए मामले की जांच से जोड़ेगी।
मामले की सुनवाई की शुरुआत से ही महान्यायवादी मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा कि इस रपट में पूर्व सीबीआई प्रमुख रंजीत सिन्हा के बारे में कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की गई है।
रपट के मुताबिक, आगंतुक पुस्तिका असली है और कुछ लोग उनसे 50-60 बार मिले हैं।
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