कश्मीर में 5वें दिन भी कर्फ्यू जारी, 1 और व्यक्ति की मौत (राउंडअप)

श्रीनगर, 13 जुलाई (आईएएनएस)। हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के सुरक्षा बलों के हाथों मारे जाने के बाद व्याप्त तनाव के बीच पांचवें दिन बुधवार को सुरक्षा बलों पर पथराव करने वाली भीड़ पर चलाई गई गोली से कश्मीर घाटी में एक और व्यक्ति की मौत हो गई। कश्मीर घाटी कई वर्षो के बाद पिछले कुछ दिनों से हिंसा के तीव्र दौर से गुजर रही है।

श्रीनगर, 13 जुलाई (आईएएनएस)। हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के सुरक्षा बलों के हाथों मारे जाने के बाद व्याप्त तनाव के बीच पांचवें दिन बुधवार को सुरक्षा बलों पर पथराव करने वाली भीड़ पर चलाई गई गोली से कश्मीर घाटी में एक और व्यक्ति की मौत हो गई। कश्मीर घाटी कई वर्षो के बाद पिछले कुछ दिनों से हिंसा के तीव्र दौर से गुजर रही है।

हिंसक प्रदर्शनों से सर्वाधिक प्रभावित दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले में पथराव कर रही भीड़ पर पुलिस द्वारा चलाई गई गोली से यह मौत हुई।

एक पुलिस अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि सुरक्षा बलों ने संयम से काम लिया, लेकिन हाथों में पत्थर लिए उग्र भीड़ जब पुलिस की ओर बढ़ने लगी तो एक पुलिसकर्मी ने गोली चला दी। गोलीबारी में एक व्यक्ति जख्मी भी हुआ है।

इससे पहले बीते दिनों हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान घायल हुए दो और व्यक्तियों की बुधवार को मौत हो गई और इसके साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 37 हो गई।

अनंतनाग में पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी के अलावा शेष कश्मीर में बुधवार को स्थिति सामान्य रही, हालांकि कुछ जगहों पर पथराव की छिट-पुट घटना के बीच तनाव की स्थिति बनी रही और अधिकतर इलाकों में कड़ाई से कर्फ्यू लागू रहा।

कर्फ्यू और अलगाववादियों द्वारा घोषित हड़ताल के कारण कश्मीर में जन-जीवन थमा रहा। हिंसक घटनाओं से सर्वाधिक प्रभावित दक्षिणी कश्मीर निजी मोबाइल सेवाएं रद्द होने और निषेधाज्ञा के कारण शेष कश्मीर से कटा रहा।

हालांकि सरकारी मोबाइल सेवा भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की सेवाएं जारी रहीं।

अधिकारियों ने बताया कि हर तरह के मौसम में कश्मीर घाटी से जोड़ने वाला जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग बाधित रहा। सिर्फ रात में श्रीनगर से आने-जाने वाले वाहनों को राजमार्ग पर सफर की इजाजत है।

श्रीनगर में सड़कें दिन भर सूनी रहीं और दुकानें और अन्य कारोबार, बैंक तथा निजी कार्यालय सभी बंद रहे। सचिवालय में मामूली कर्मचारी उपस्थित थे। श्रीनगर के पुराने इलाकों में लोगों को पांच दिनों के कर्फ्यू के कारण दैनिक जरूरत की चीजें खत्म होने से कठिनाई का सामना करना पड़ा।

बुधवार को अलगाववादियों ने ‘शहीद दिवस’ मनाने के लिए रैली निकालने का अह्वान किया था। उल्लेखनीय है कि 13 जुलाई, 1931 को पुलिस की गोलीबारी में डोगरा साम्राज्य का विरोध कर रहे प्रदर्शन करने वाले कश्मीरियों की याद में कश्मीर में हर साल इसी दिन ‘शहीद दिवस’ मनाया जाता है।

पिछले पांच दिनों से अपने-अपने घरों में नजरबंद अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक और सैयद अली शाह गिलानी कर्फ्यू को चुनौती देते हुए श्रीनगर स्थित शहीदों के समाधि स्थल की ओर जाने की कोशिश की। पुलिस ने हालांकि उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया।

हालांकि जम्मू एवं कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अपने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ समाधि स्थल गईं। उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और घाटी में शांति के लिए फिर से अपील की।

उन्होंने कहा, “मैं सभी से शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील करती हूं ताकि अब किसी और को अपनी जान न गंवानी पड़े।”

उन्होंने कहा कि आठ जुलाई को वानी की मौत के बाद शुरू हुए हिंसक प्रदर्शनों में “लोगों की मौत का उन्हें अफसोस है, लेकिन कोई भी तरकीब अब उन्हें वापस नहीं ला सकती।”

महबूबा ने आगे कहा, “मैं इससे बेहद दुखी हूं, लेकिन मेरा दुख मृतकों के परिवार वालों के आगे कुछ भी नहीं है।”

दक्षिणी कश्मीर में हालात ज्यादा खराब हैं, जहां से सर्वाधिक मौतों की खबर है। कश्मीर घाटी में बीते पांच दिनों से चल रहे हिंसक प्रदर्शनों में मृत 36 लोगों में अकेले दक्षिणी कश्मीर में 33 लोग मारे गए।

दो अन्य मृतक श्रीनगर और कुपवाड़ा जिलों से थे, जबकि एक पुलिस कांस्टेबल की भी मौत हुई है। दक्षिणी कश्मीर में भीड़ द्वारा झेलम नदी में धकेल देने के कारण पुलिस कांस्टेबल की मौत हुई।

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