बाढ़ का पानी कलौलीतीर और आसपास के इलाकों के नजदीक भरने से लोगों में चिंताएं बढ़ गई हैं। उधर धसान व बिरमा नदी में भी बाढ़ का खतरा मंडरा गया है।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में बारिश से जहां कई क्षेत्रों में बाढ़ का कहर बरप रहा है, वहीं झांसी में कई बांधों से साढ़े सात लाख क्यूसेक पानी बेतवा व यमुना नदी में छोड़े जाने से हमीरपुर में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। आज बेतवा नदी उफनाने से बाढ़ का पानी टिकरौली गांव में घुस गया है, जिससे ग्रामीणों में अफरातफरी मची हुई है।
टिकरौली गांव का संपर्क भी जिला मुख्यालय से कट गया है। नावों से लोग आरपार हो रहे हैं। कुछेछा स्थित राठ रोड भी बाढ़ के मुहाने आ चुका है। लगातार बेतवा का जलस्तर बढ़ने से अमिरता, कलौलीतीर व अन्य तटवर्ती गांवों में खतरे की घंटी बज गई है।
मौरंग खदानें तो पहले से ही बाढ़ का पानी घुसने से बंद है, मगर अब जिला मुख्यालय और इससे जुड़े डिग्गी, पुराना जमुना घाट तथा मेरापुर सहित कई मजरों में भी बाढ़ का खतरा सिर पर मंडरा गया है। बड़ी संख्या में किसानों की खेत बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गए हैं।
प्राकृतिक आपदा विभाग के मुताबिक, बांधों से साढ़े सात लाख क्यूसेक पानी बेतवा नदी में छोड़ा गया था, जिससे बुधवार देर रात से ही बेतवा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। आज बेतवा नदी का जलस्तर 100 मीटर का निशान पार कर गया। यमुना नदी का जलस्तर 98 मीटर तक पहुंच गई है। हालांकि दोनों नदियां अभी खतरे के निशान से कई मीटर नीचे बह रही हैं।
dharmpath.com dharmpath