पणजी, 16 जुलाई (आईएएनएस)। नौसेना की महिला अधिकारियों ने अपनी दृढ़ता और साहस के जरिए यह साबित कर दिया कि महिलाओं के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। भारतीय नौसेना की ये छह महिला अधिकारी मॉरीशस की समुद्री यात्रा का अभियान पूरा कर लौट आई हैं।
पणजी, 16 जुलाई (आईएएनएस)। नौसेना की महिला अधिकारियों ने अपनी दृढ़ता और साहस के जरिए यह साबित कर दिया कि महिलाओं के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। भारतीय नौसेना की ये छह महिला अधिकारी मॉरीशस की समुद्री यात्रा का अभियान पूरा कर लौट आई हैं।
केवल महिलाओं वाले पोत आईएनएस महादेई ने गोवा के आईएनएस मांडोवी पर गुरुवार की शाम लंगर डाला। महिला अधिकारियों का यह दल इसी पोत से अगले साल पूरी दुनिया की यात्रा के लिए रवाना होने वाला है। यह यात्रा उसके अभ्यास का हिस्सा थी।
हिंद महासागर और अरब सागर में मानसून की वजह से हालात बहुत खराब थे। ऐसा लग रहा था कि महिला चालक दल की सदस्य लहरों से थोड़ी चोटिल हैं। इनका पोत लगातार लहरों के थपेड़े सहता रहा। लेकिन इस दल की नेता वर्तिका जोशी के अनुसार, यह तो एक तरह का परीक्षण और चुनौती मात्र है जिसकी वे तलाश मे थीं।
पोत के लंगर डालने के तुरंत बाद वर्तिका ने आईएएनएस से कहा, “हमलोगों ने साल के इस समय को इसलिए चुना ताकि हम लोग अपने प्रशिक्षण के दौरान खराब मौसम का मुकाबला कर सकें और हम पूरी दुनिया की सैर के लिए तैयार हैं। समुद्र में मौसम बहुत खराब था, बहुत मुश्किल हुई, लेकिन इस यात्रा का यही उद्देश्य भी था।”
इस यात्रा के दौरान चालक दल में केवल महिलाएं ही थीं। वर्तिका के अलावा इस टीम में लेफ्टिनेंट बी. ऐश्वर्या, पी. स्वाति, प्रतिभा जामवाल, विजया और पायल गुप्ता शामिल थीं।
ये समुद्र के रास्ते विश्व भ्रमण के लिए प्रशिक्षण पाने मॉरीशस के पोर्ट लुइस में थीं। यह दूसरी 5000 नॉटिकल मील (9260 किलोमीटर) से अधिक है। यह दूसरी तय करने में 16 दिन और रात लगे। जोशी ने दावा किया कि रातें विशेष तौर पर चुनौतीपूर्ण होती थीं।
वर्तिका ने कहा, “रात में जब आपकी नौका में खराबी आती है, आप उसकी मरम्मत करने की कोशिश करते हैं। अंत में जब सही हो जाता है तो आपको चिंता से मुक्त होने का अहसास होता है।”
कमांडर दिलीप धोंडे ने इसी आईएनएस महादेई के जरिए दुनिया की यात्रा की है। वह मॉरीशस में जोशी और उनकी टीम को समुद्र में यात्रा के दौरान आने वाली कठिनाइयों से निपटने के लिए जरूरी जानकारी देने के लिए मौजूद थे।
अगले साल अगस्त में दुनिया की यात्रा पर निकलने से पहले इस दल के अभी और नौकायन प्रतियोगिता में भाग लेने की उम्मीद की जा रही है।
इस टीम की कमांडर वर्तिका जोशी ने कहा, नौसेना महिला सशक्तीकरण का समर्थन करती है। सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं का होना इस सशक्तीकरण का सबसे अच्छा उदाहरण है। यह दुनिया को दिखाने बहुत अच्छा तरीका है कि महिलाएं भी ये सब कुछ कर सकती हैं।
dharmpath.com dharmpath