लखनऊ, 18 जुलाई (आईएएनएस)। एक वाम दल का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के चंदौैली व मिर्जापुर जिले में रेलवे के ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्राइट कॉरिडोर के लिए जमीन का अधिग्रहण कर रही सरकार किसानों से बर्बर सलूक कर रही है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के राज्य सचिव रामजी राय ने कहा कि उनकी पार्टी भूमि अधिग्रहण के खिलाफ स्थानीय किसानों के एक आंदोलन का समर्थन कर रही है। इस अधिग्रहण में सभी नियमों व कानूनों का उल्लंघन किया जा रहा है।
राय ने कहा, “चंदौली के चीतो गांव के किसान इस भूमि अधिग्रहण के खिलाफ बीते 25 फरवरी से धरने पर बैठे हैं और शशिकांत कुशवाहा के नेतृत्व में हमारे पार्टी कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय के सामने 11 जुलाई से भूख हड़ताल पर हैं।”
उन्होंने कहा कि अगर भूमि अधिग्रहण को तत्काल नहीं रोका गया, तो आंदोलन और उग्र होगा।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन पोलित ब्यूरो के सदस्य राय ने कहा, “प्रदर्शनकारियों की सुनने के बजाय अधिकारी किसानों की आवाज दबाने में लगे हैं।”
उन्होंने कहा कि एक अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने किसानों को आश्वस्त किया था कि उन्हें रेलवे में नौकरी, बाजार भाव पर मुआवजा दिया जाएगा और सही तरीके से उनका पुनर्वास होगा।
राय ने कहा, “लेकिन इन बातों का क्रियान्वयन नहीं हो रहा है, जिसके कारण हमें आंदोलन की रास्ता अख्तियार करना पड़ा।”
ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्राइट कॉरिडोर का क्रियान्वयन भारतीय रेलवे द्वारा किया जा रहा है।
परियोजना के तहत पंजाब के लुधियाना से उत्तर प्रदेश के खुर्जा तक माल ढोने के लिए 1,839 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का निर्माण किया जा रहा है, क्योंकि इस मार्ग पर दोनों तरफ उद्योगों का विकास हुआ है।
उत्तर प्रदेश में परियोजना की लंबाई 1,049 किलोमीटर है, जो 18 जिलों से होकर गुजर रही है। इस परियोजना का वित्त पोषण वल्र्ड बैंक कर रही है।
राज्य सरकार ने इस परियोजना के माध्यम से 42 हजार करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान लगाते हुए कहा है कि यह उत्तर प्रदेश में औद्योगिक क्रांति लाएगा।
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