बेंगलुरु, 25 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक के सरकारी परिवहन निगम के करीब 1.23 लाख कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से सोमवार को समूचे कनार्टक में बस सेवा बुरी तरह प्रभावित रही। सबसे ज्यादा असर बेंगलुरु में देखा गया।
हड़ताली कर्मचारी वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने विद्यार्थियों को परेशानी से बचाने के लिए सोमवार और मंगलवार को स्कूलों व कॉलेजों में छुट्टी की घोषणा कर दी है। सप्ताह के पहले दिन हजारों यात्री राज्य भर में विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए हैं। निजी बसों की संख्या इतनी नहीं है कि वह इन तमाम लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचा सके।
एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “करीब 120 बसों को पत्थरबाजी से नुकसान पहुंचाया गया है जिसमें से 65 बसें बेंगलुरु की हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने हड़ताल पर रोक लगा रखी है। राज्य सरकार ने भी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। जब दूसरी यूनियन के कर्मचारी बसों को डिपो से निकाल रहे थे तो हड़ताली कर्मचारियों ने पत्थरबाजी की।”
हड़ताल के कारण कनार्टक सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) और राज्य में इसकी सहायक एजेंसियों की 23,000 बसें सड़क पर नहीं हैं।
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने के लिए कई डिपो, बस टर्मिनल और सार्वजनिक स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।
राज्य के परिवहन मंत्री राममलिंगा रेड्डी ने बताया, “करीब 13,000 निजी बसों को स्टेट कैरिज परमिट के साथ उतारा गया है और इन्हें बेंगलुरु, मैसूर और अन्य स्थानों के बीच चलाया जा रहा है।”
मेट्रो और अन्य लोकल ट्रेन के अधिक फेरे लगाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केएसआरटीसी वर्कर्स यूनियन से हड़ताल खत्म कर बातचीत करने का आग्रह किया है।
राममलिंगा रेड्डी ने कहा, “अगर यूनियन 30-35 फीसदी वेतन वृद्धि की मांग करती हैं तो उसे पूरा करना मुश्किल है। इससे करदाताओं पर 4,650 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और राज्य के अन्य विभागों के कर्मचारी भी ऐसी ही मांग करने लगेंगे। अगर वे हड़ताल खत्म कर बातचीत के लिए आगे आते हैं तो हम उनकी मांगों पर विचार करेंगे।”
केएसआरटीसी कर्मचारी संघ के महासचिव एच. वी. अनंत सुब्बाराव ने बताया कि हड़ताल पूरी तरह सफल है और कर्मचारियों का इसे पूर्ण समर्थन प्राप्त है।
सुब्बाराव ने कहा, “हड़ताल के कारण लोगों को हुई असुविधा के लिए हम क्षमाप्रार्थी है। यह हड़ताल इसलिए हुई है क्योंकि राज्य सरकार ने नंबवर 2015 से लंबित हमारी मांगों पर कई दौर की बातचीत और बार-बार याद दिलाने का बावजूद ध्यान नहीं दिया।”
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