शिमला, 26 जुलाई (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि राज्य में मादक पदार्थ से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में सक्रिय नशीली दवाओं के माफियाओं को गिरफ्तार करने के लिए तीन सप्ताह के अंदर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी की अध्यक्षता में एक कार्यबल का गठन करें।
अदालत ने अपने निर्देश में कहा कि जिन जिलों में निषिद्ध किए गए द्रव्य की मात्रा वाणिज्यिक अनुमति से ज्यादा हो, वहां जांच की निगरानी पुलिस अधीक्षक स्तर का अधिकारी करेगा।
न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने देवी सिंह की रिहाई के निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए देवी सिंह को दोषी करार दिया और हिमाचल के पुलिस प्रमुख को आदेश दिया कि जांच कर रहे अधिकारियों को निर्देश जारी किया जाए कि वे मादक पदार्थ में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के स्रोत और राज्य के अंदर या बाहर उनके निर्माण स्थल के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा करें।
अदालत इस मामले में दो अगस्त को सजा की अवधि सुनाएगी।
पीठ ने कहा, “राज्य में कोरियर के द्वारा या किसी अन्य वाहक के हाथों ये नशीले पदार्थ जिन लोगों से खरीदे जा रहे हैं और जिन लोगों को बेचे जा रहे हैं, उनके खिलाफ निश्चित तौर पर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।”
अदालत ने राज्य के प्रधान सचिव से कहा कि विशेष कार्यबल का गठन करते समय उन्हें संबंधित अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट का खुद अध्ययन करना चाहिए ताकि वह ये सुनिश्चित कर सकें कि इस कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ अधिकारियों का ही चयन हो।
पुलिस अधिकारियों ने आईएएनएस को बताया कि पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में स्थित दुरूह घाटियों और ऊंची पहाड़ियों पर भांग और अफीम की खेती की जाती है।
कुल्लू, चंबा, मंडी और शिमला के सुदूरवर्ती इलाके देश में सर्वाधिक नशीले पदार्थो का उत्पादन करने वाले जिलों में शामिल हैं, जहां से बड़ी मात्रा में ये नशीले पदार्थ यूरोप तस्करी किए जाते हैं।
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