रांची, 27 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा की कार्यवाही विवादित अधिवास नीति, भूमि संबंधित दो अधिनियमों में संशोधन के लिए अध्यादेश तथा अन्य मुद्दों को लेकर तीसरे दिन बुधवार को भी बाधित हुई।
विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने मुद्दे को सुलझाने के लिए बुधवार सुबह 10.30 बजे एक सर्वदलीय बैठक बुलाई, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला।
विपक्षी विधायकों ने अधिवास नीति के अलावा, भूमि संबंधित दो अधिनियमों में बदलाव के लिए राष्ट्रपति को भेजे गए अध्यादेश -छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम तथा संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम-सहित कई मुद्दों को लेकर चार बार स्थगन प्रस्ताव पेश किया। अधिवास नीति के संबंध में सराकर अधिसूचना जारी कर चुकी है।
विपक्षी सदस्य मुद्दों पर चर्चा कराना चाहते थे और उन्होंने प्रश्नकाल नहीं चलने दिया।
विधानसभा अध्यक्ष ने हालांकि सभी स्थगन प्रस्तावों को खारिज कर दिया।
अध्यक्ष ने कहा, “प्रश्नकाल को बाधित करने के लिए स्थगन प्रस्ताव के रूप में एक गलत तरीका अपना लिया गया है।”
विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने कहा, “हम यहां केवल सरकार द्वारा प्रस्तावित बजट को पारित करने के लिए नहीं है। कई गंभीर मुद्दे हैं, जिनका निपटारा करने की जरूरत है। राष्ट्रपति के पास भेजा गया अध्यादेश चिंता का विषय है। अधिवास नीति राज्य के लोगों के खिलाफ है। हम चुप नहीं रह सकते।”
इसके बाद, विपक्षी विधायक अध्यक्ष की आसंदी के निकट इकट्ठा होकर नारे लगाने लगे, जिसके कारण अध्यक्ष को कार्यवाही अपराह्न 12.30 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
अपराह्न 12.30 बजे जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो विपक्षी विधायक एक बार फिर अध्यक्ष की आसंदी के निकट इकट्ठा होकर नारे लगाने लगे, जिसके कारण अध्यक्ष को कार्यवाही अपराह्न 2.00 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
संवाददाताओं से बातचीत में संसदीय मामलों के मंत्री सरयू राय ने कहा कि विपक्षी पार्टियों को मुद्दा उठाने का अधिकार है, लेकिन वे अपनी शर्ते नहीं थोप सकते।
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