धर्म-अध्यात्म

भय से मनोबल क्षीण होता है

भय को जीवन की सहज प्रवृत्ति माना जाता है। अनुशासन, व्यवस्था, नियमादि के पालन के लिए भय की उपयोगिता है। जीवन की सुरक्षा, बचाव और सावधानी आदि के लिए भय की आवश्यकता है। इसके बावजूद भय एक सीमा तक सहनीय और उपयोगी भले ही हो, लेकिन लगातार डरे व सहमे-सहमे रहना, मूढ़ता, जड़ता, अज्ञान और आतंक से त्रस्त ग्रस्त रहना …

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धर्म क्या है..

धर्म क्या है? जब युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछा तो उन्होंने उत्तर दिया था, जिससे अभ्युदय (लौकिक उन्नति) और नि:श्रेयस (पार लौकिक उन्नति-यानी मोक्ष) सिद्ध होते हों वही धर्म है। धर्म अधोगति में जाने से रोकता है और जीवन की रक्षा करता है। धर्म ने ही सारी प्रजा को धारण कर रखा है। इसलिए जिससे धारण और पोषण सिद्ध …

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आत्मा का भोजन है सत्संग, स्वाध्याय व संध्या

जीवन को समुन्नत बनाने और सुधारने के लिए सत्संग मूलाधार है। जीवन के उद्देश्य की प्राप्ति में सत्संग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। सत्संग क्या है? इस संसार में तीन पदार्थ- ईश्वर, जीव और प्रकृति- सत हैं। इन तीनों के बारे में जहां अच्छी तरह से बताया जाए, उसे सत्संग कहते हैं। श्रेष्ठ और सात्विक जनों का संग करना, …

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सफलता के लिए धैर्य आवश्यक

कामयाबी के शिखर पर कुशलता के सोपानों से चढ़ा जाता है। सफलता बौद्धिक प्रतिभा का संग्रह मात्र नहीं, बल्कि बौद्धिक क्षमता के समुचित सुनियोजन की कुशलता का नाम है। सफलता एक ऐसी तकनीक का नाम है, जो जाने हुए अर्जित ज्ञान को समय की मांग के अनुरूप क्रियाशील व क्रियान्वित कर सके। नई सोच व नए विचार व नित नई …

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गीता प्रेस गोरखपुर के संस्थापक:स्वर्गीय हनुमान प्रसाद पोद्दार

आज `गीता प्रेस गोरखपुर’ का नाम किसी भी भारतीय के लिए अनजाना नहीं है। सनातन हिंदू संस्कृति में आस्था रखने वाला दुनिया में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा जो गीता प्रेस गोरखपुर के नाम से परिचित नहीं होगा। इस देश में और दुनिया के हर कोने में रामायण, गीता, वेद, पुराण और उपनिषद से लेकर प्राचीन भारत के ऋषियों …

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क्या है कलश का महत्व

गाजियाबाद। गाजियाबाद के वसुंधरा सेक्टर तीन में बृहस्पतिवार से भागवत कथा का प्रारंभ किया गया। इस मौके पर कलश यात्रा निकाली गयी। कथा के पहले दिन आत्म मुनि महाराज ने कलश के महत्व के बारे में बताया। महाराज ने कहा कि कलश रिद्धि- सिद्धि का प्रतीक है। इसका हिंदू धर्म में अपना महात्म्य है। उन्होंने कहा कि कलश हमारे जीवन …

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बर्फ के कटोरे में विश्व के रक्षक

देहरादून। सिख एवं हिंदुओं की सांझी विरासत है हेमकुंड-लोकपाल। संस्कृत में हेम बर्फ को कहते हैं, जबकि कुंड का तात्पर्य है कटोरा। इसी तरह लोकपाल विश्व के रक्षक को कहा गया है। लोकपाल वही जगह है, जहां लक्ष्मणजी, अपनी पसंदीदा जगह होने के कारण ध्यान पर बैठ गए थे। इस जगह को सिखों के 10वें गुरु, गोविंद सिंह महाराज के …

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धारी मंदिर हटा तो बदरी-केदार यात्रा नहीं

देहरादून। धारी देवी मंदिर की अपलिफ्टिंग का मुद्दा गरमा गया है। गंगा सेवा मिशन के प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप ने तो इस मुद्दे पर बदरी-केदार यात्रा रोकने तक की चेतावनी दे दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा-कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीति करती है। स्वामी आनंद स्वरूप ने मां धारी देवी मंदिर पर बनने वाले बांध का विरोध किया। उन्होंने कहा …

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जन-जन के नाथ बदरीनाथ

चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है। 16 मई को बदरीनाथ धाम के कपाट खुल गए। इससे पहले 13 मई को यमुनोत्री-गंगोत्री और 14 मई को केदारनाथ धाम के कपाट खुल चुके हैं। आइए जानें, पवित्र बदरीनाथ धाम का माहात्म्य.. बदरी शब्द ‘ब’ एवं ‘दरी’ शब्दों के संयोग से बना है। ब का अर्थ है – परमात्मा और दरी का मतलब- …

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समाज को दिखाया सन्मार्ग

सनातन संस्कृति को पुन‌र्प्रतिष्ठित करने वाले अद्वैत वेदांत के प्रणेता आदि शंकराचार्य को संसार के प्रमुख दार्शनिकों में मान्यता मिली हुई है। उनका अद्वैत दर्शन उनके भाष्यों में दृष्टिगत होता है। आदि शंकराचार्य जयंती के अवसर पर .. भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान में आदि शंकराचार्य का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि सनातन धर्म के अनुयायी उन्हें भगवान शंकर का अवतार …

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