आधुनिक वैज्ञानिक युग में यज्ञ व हवन आदि वैदिक अनुष्ठानों को अंधविश्वास कहकर उनका उपहास उड़ाने वाले लोगों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। दरअसल ऐसे लोगों को यज्ञ-हवन आदि कर्मकांडों के वैज्ञानिक स्वरूप की रंच मात्र भी जानकारी नहीं है। यदि ऐसे लोगों को जानकारी होती तो वे इन कर्मकांडों के संदर्भ में अपनी अज्ञानता का ढिंढोरा न …
Read More »धर्म-अध्यात्म
जिंदगी वास्तव में प्रभु का उत्तम उपहार है
बचपन से हम सुनते आ रहे हैं कि जिंदगी का सफर क्षणभंगुर है। एक पल हंसी-खुशी और अगले पल में गम, यही तो है जिंदगी की सच्ची हकीकत। ऐसी क्षणभंगुर जिंदगी को याद करते समय हमारे मन में समय-समय पर विचार आ जाते हैं कि इस क्षणभंगुर जीवन में हम क्या करें और क्या न करें? क्षणभंगुर जिंदगी के बारे …
Read More »महानिर्वाणी से हुई थी महामंडलेश्वर पद की शुरुआत
हरिद्वार। महामंडलेश्वर पद की शुरुआत श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा से ही हुई थी। सैकड़ों वर्ष पूर्व सबसे पहले महामंडलेश्वर स्वामी जयंतपुरी जी महाराज को बनाया गया था। आचार्य महामंडलेश्वर अखाड़ा के चौथे आचार्य महामंडलेश्वर थे। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महामंडलेश्वर स्वामी रविंद्रपुरी महाराज ने बताया कि महामंडलेश्वर पद की शुरुआत उन्हीं के अखाड़ा से हुई थी। इस क्रम में …
Read More »गीता जप से होगा कल्याण
गीता पर सबका अधिकार है, यह सिर्फ मेरा नहीं है। यह समाज देश के लिए लिखा गया है। यह सबके समझ में आ जाये, इसलिए इसका हिन्दी रूपांतर हुआ है। इसके प्रसारण पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने सेक्टर आठ स्थित यथार्थ गीता शिविर में प्रवचन के दौरान यह विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा …
Read More »शिव अनंत हैं
मानव सभ्यता में आध्यात्मिक जिज्ञासा और प्रेरणा का कारण और परिणाम दोनों ही शिव हैं। शिव अनंत हैं। वे सार्वभौमिक और सार्वकालिक भी हैं। वे किसी एक सभ्यता के द्योतक नहीं हैं। वे तो सभ्यताओं के नियामक हैं। शिव स्वयं में एक संस्कृति हैं। एक ऐसी अनवरत धारा, जो अध्यात्म और दैविक शक्तियों के प्रति मानवीय जिज्ञासाओं का प्रतिनिधित्व करती …
Read More »सरयू स्नान के बाद ही होती अयोध्या की परिक्रमा
अयोध्या। जलरूपेण ब्रंौव सरयू मोक्षदा सदा। नैवात्र कर्मशो भोगो रामरूपो भवेन्नर:।। अर्थात पावन सलिला श्री सरयूजल रूप में साक्षात ब्रहमा हैं जो हमें मोक्ष प्रदान करती हैं। इनकी कृपा से जीव कर्मजन्य भोगों से मुक्त होकर रामरूप हो जाता है। मान्यता है कि सरयू बैकुंठ के चिन्मय साकेतलोक की वह पावन नदी है जो श्रीराम की बाललीला का दर्शन करने …
Read More »यज्ञ मानव जीवन का श्रेष्ठ कर्म
मुजफ्फरपुर। सद्गुरु सदाफल देव विहंगम संस्थान के तत्वावधान में रविवार को ब्रह्माचारी जय प्रकाश के नेतृत्व में रामबाग चौक में महायज्ञ का आयोजन किया गया। पुरोहित जय प्रकाश ने कहा कि यज्ञ मानव जीवन का श्रेष्ठ कर्म है। मानव के जीवन में आपसी प्रेम स्थापित करता है। प्रकृति में संतुलन लाता है, रोगों से निवृत्ति यज्ञोपचार द्वारा संभव है। देव …
Read More »फिर योग तंत्र की धुरी बनेगी सप्तपुरी
वाराणसी। देवाधिदेव की काशी और वह ही इसके पुराधिपति। भला इसके आकार या विस्तार का पार पाना कहां संभव। वह भी तब जबकि इसमें ही सातोंपुरियां समाहित हों। गुरु की महिमा को विस्तार देते व योग व तंत्र साधना की धुरी। बात हो रही है गुरुधाम मंदिर की जो पुरातत्व की सूची में बद्ध और अनमोल धरोहर भी है। वक्त …
Read More »चंद्रग्रहण पर आज नौ घंटे बंद रहेंगे मंदिरों के कपाट
वर्ष 2013 के पहले चंद्रग्रहण अल्प खंडग्रास (थोड़े समय के लिए प्रभाव रहना) की घड़ी हनुमान जयंती पर आ रही है। हनुमान जयंती पर इस बार चंद्रग्रहण का साया मंडरा भी रहा है। हनुमान जयंती पर चंद्रग्रहण से नौ घंटे पूर्व सूतक लगने के कारण 25 अप्रैल को शाम चार बजे के बाद भक्तों को हनुमानजी के दर्शन नहीं होंगे। …
Read More »चंद्रग्रहण में लें आध्यात्मिक लाभ
भारतीय संस्कृति में ग्रहण को नितांत खगोलीय घटना न मानकर उसे अध्यात्म से भी जोड़ा गया है। ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण के कुछ घंटों पूर्व से उसका वेध (सूतक) प्रारंभ हो जाता है, जो ग्रहण की समाप्ति तक प्रभावी रहता है। धर्मग्रंथों के अनुसार, ग्रहण के सूतककाल में भोजन, शयन, पूजन आदि निषिद्ध होते हैं। सिर्फ मानसिक जप व साधना …
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