धर्म-अध्यात्म

स्वामी चिन्मयानंद वेदान्त दर्शन के एक महान प्रवक्ता थे

स्वामी चिन्मयानंद हिन्दू धर्म और संस्कृति के मूलभूत सिद्वांत वेदान्त दर्शन के एक महान प्रवक्ता थे। उन्होंने सारे देश में भ्रमण करते हुए देखा कि देश में धर्म संबंधी अनेक भ्रांतियां फैली हैं। उनका निवारण कर शुद्व धर्म की स्थापना करने के लिए उन्होंने गीता ज्ञान-यज्ञ प्रारम्भ किया और 1953 ई में चिन्मय मिशन की स्थापना की। स्वामी जी के …

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यज्ञ हमारी संस्कृति का मूलाधार है

यज्ञ हमारी संस्कृति का मूलाधार है। जिस प्रकार जीवन का आधार जल होता है उसी प्रकार समस्त शुभ कर्मो का आधार यज्ञ होता है। इसे अग्निहोत्र भी कहते हैं। अग्निहोत्र दो शब्दों के योग से बना है अग्नि और होत्र। जिस कर्म में हम श्रद्धापूर्वक एक निर्धारित विधि के अनुसार मंत्र पाठ सहित आहुति देते हैं उसे अग्निहोत्र कहते हैं। …

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गंगा बचाने को संत समाज गंभीर नहीं

देहरादून। सरकार और वैज्ञानिकों के साथ ही संत भी देशभर में बन रहे बांधों के लिए दोषी है। गंगा के स्वरूप को बचाने के लिए संतों की जिम्मेदारी अधिक है, लेकिन शीर्ष पदों पर बैठे संत इसके लिए गंभीर नहीं है। यह बात स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (जीडी अग्रवाल) ने गंगा अविरलता चिंतन यात्रा के समापन पर कही। उन्होंने कहा कि …

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छतरपुर मंदिर की पूजा विधि व श्लोक

छतरपुर मंदिर मूल रूप से मां दुर्गा को समर्पित है। दुर्गा पूजा और नवरात्रि के अवसर पर पूरे देश से यहां भक्त एकत्र होते हैं। इस मंदिर की अलग पूजा विधि है। पूजा विधि- जो साधक कुण्डलिनी जागृत करने की इच्छा से देवी अराधना में समर्पित हैं उन्हें दुर्गा पूजा के छठे दिन मां कात्यायनी जी की सभी प्रकार से …

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गर्मी के मौसम में पेयजल व्यवस्था को सुचारु बनाने नोडल अधिकारी नियुक्त प्रदेश में साढ़े चार लाख से अधिक हेण्डपम्प कार्यशील

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने गर्मी के मौसम को देखते हुए पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाये रखने के लिये जिलेवार नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है। यह नोडल अधिकारी गर्मी के मौसम के दौरान उनके प्रभार के जिलों में नियमित दौरा कर पेयजल व्यवस्था पर नजर रखेंगे। नोडल अधिकारियों को जिलों के दौरे के समय कलेक्टर एवं जन-प्रतिनिधियों से भी …

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भगवान के बनो मिलेगी सुख शांति

पानीपत। भगवान का बनने में जो सुख व खुशी मिलती वह विश्व की कोई भी वस्तु को प्राप्त करने में नहीं हो सकती है। भगवान तो सुख व शांति का सागर है। जो उसके आगे अपना सब न्यौछावर करता है तो भगवान भी उसके सारी कामनाएं पूरी कर देते हैं। यह बात शिवाजी स्टेडियम में आयोजित अलविदा तनाव शिविर के …

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गंगा अध्यात्म की मूल धारा

पतित पावनी मां गंगा हमारी संस्कृति की मूलधारा हैं। सनातन धर्म का विकास मां गंगा की पावन गोद में हुआ है सभी राष्ट्रप्रेमी लोगों का दायित्व है वे यथा संभव ऐसा प्रयास करे कि भारतीय संस्कृति एवं अध्यात्म की श्रोत सुरसरि गंगा का प्रवाह सतत बना रहे। उक्त विचार स्वामी प्रज्ञानंद जी महाराज ने प्रवचन के दौरान यह विचार व्यक्त …

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क्या शिव ने बुद्ध के रूप में फिर से जन्म लिया?

भगवान शंकर को हिंदू प्रथम, मध्य और अंतिम, सबकुछ मानते हैं। शिव ही है हिंदू धर्म का मूल और वही है धर्म का अंतिम सत्य। शिव से ही हिंदू और जैन की नाथ और विदेहियों की परंपरा की शुरुआत मानी गई है। शिव से ही ध्यान परंपरा का प्रारंभ होता है। क्या हम ऐसा कहें कि 27 बुद्ध पुरुषों में …

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सिख का अर्थ है शिष्य

सिख धर्म का उदय गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के साथ होता है। सिख का अर्थ है शिष्य। जो लोग गुरु नानक जी की शिक्षाओं पर चलते गए, वे सिख हो गए। गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईस्वी में लाहौर के तलवंडी (अब ननकाना साहिब) में हुआ। बचपन से ही उनका मन एकांत, चिंतन और सत्संग में …

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