धर्म-अध्यात्म

विशेषताओं से भरा तालाब पाताल गंगा

मऊ। स्थानीय तहसील क्षेत्र के ग्रामसभा दरगाह में महान सूफी सैयद मीरा शाह बाबा की मजार के बगल में स्थित तालाब अपनी स्थापना से लेकर अब तक लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यह पाताल गंगा के नाम से जाना जाता है। कई विशेषताओं को समेटे इस तालाब की ख्याति दूर तलक है। इसके वजूद में आने …

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मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाते बाबा बड़भाग सिंह जी

गोंदपुर बनेहड़ा। उत्तर भारत का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डेरा बाबा बड़भाग सिंह जी की तपस्थली मैड़ी ऊना जिला मुख्यालय से 42 किलामीटर दूर तथा तलवाड़ा (पंजाब) से 45 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। इसकी गणना उत्तर भारत के प्रसिद्ध तीर्थस्थलों के में होती है। यह पवित्र स्थान सोढी संत बाबा बड़भाग सिंह (1716-1762) की तपोस्थली है। 300 वर्ष पूर्व बाबा …

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शिष्य की परिभाषा

शिष्य वह है जो अपने जीवन को उत्कर्ष की और ले जाए, जो मोह और अज्ञान- से अपने आपको बाहर निकालना चाहता है, ऐसे शिष्य को गुरु यदि उपदेश देता है तो उसे कुछ लाभ भी होता है। जिसके जीवन में ऊपर उठने की तमन्ना ही नहीं है और जो न अज्ञान को दूर करना चाहे, उसे गुरु के पास …

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नशे की लत

नदी के तट पर कुटिया में एक संत रहते थे। किसी कंपनी का एक अधिकारी संत के पास पहुंचा। संत नदी के किनारे रेत पर टहल रहे थे। अधिकारी बोला – मैं सिगरेट छोड़ना चाहता हूं, लेकिन छोड़ ही नहीं पाता। कभी दफ्तर में मीटिंग लंबी हो जाती है, तो बिना सिगरेट बुरा हाल हो जाता है। मैं क्या करूं? …

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परमात्मा उसीका है, जो पाना जानता है

मनुष्य को वस्तुओं की कद्र करना सीखना ही चाहिए । काम में आनेवाली वस्तुएं इधर-उधर पड़ी रहें, यह ठीक नहीं है । किसी घर में वषरें से एक पुराना साज पड़ा था । उसने घर के कोने में जगह रोक रखी है, ऐसा सोचकर दिवाली के दिनों में घरवालों ने उसे निकालकर जहां कूड़ा फेंका जाता था वहां डाल दिया …

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कितने रुप और रस होते हैं सत्य के?

सत्य का कोई एक रस नहीं होता। सत्य के अपने रुप हैं, अपने रंग हैं। हमारे जीवन में सत्य हर बार अलग परिस्थिति में किसी भिन्न रुप में उतरता है। सत्य के नौ रस हैं। सत्य हमेशा विजयी होता है लेकिन इसको सिर्फ जीत और हार के मापदंड पर नहीं रखा जा सकता। सत्य के मार्ग पर विजेता वही बन …

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जीवन में आनंद कब आता है…

हर इंसान को दानी बनना चाहिए। दानी धन के नहीं बल्कि ज्ञान के, दुख के नहीं बल्कि सुख के, अशांति के नहीं बल्कि शांति के। उदासी का नहीं बल्कि प्रेम का दान करो। सेवा, साधना व सत्संग एक साथ हो तो जीवन में आनंद आता है और इसी को जीवन जीने की कला भी कहते हैं। जब हम किसी की …

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जो लोग ताकत का दुरुपयोग करते हैं उनका होता है ऐसा हाल

पुराणों में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर नाम के राक्षस के वध की कथा आती है। महिषासुर ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया। उसके बुरे कामों और विचारों का आतंक इतना बढ़ चुका था कि मनुष्य तो ठीक है उसके भय से आक्रांत देवताओं का रंग भी पीला पड़ गया था। देवी-देवताओं, जो महिषासुर के भय से सारा …

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जीवन की उत्कृष्टता और सार्थकता

सुख प्राप्ति की चेष्टा प्रत्येक मनुष्य करता है। वह जीवन रूपी घड़ी की सुई की तरह क्रियाशील रहता है। क्रियाशील न रहने वाला मनुष्य जीवित रहते हुए भी मृत्यु के समान है। सुख का आधार मनुष्य की मन:स्थिति पर आधारित है। भिन्न-भिन्न मन:स्थिति के मनुष्यों में भी सुख की सामग्रियां भिन्न-भिन्न होती हैं। नशा करने वाले मनुष्य के लिए नशा …

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108 का रहस्य

वेदान्त में एक मात्रकविहीन सार्वभौमिक ध्रुवांक 108 का उल्लेख मिलता है जिसका हजारों वर्षों पूर्व हमारे ऋषियों (वैज्ञानिकों) ने अविष्कार किया था l मेरी सुविधा के लिए मैं मान लेता हूँ कि, 108 = ॐ (जो पूर्णता का द्योतक है) प्रकृति में 108 की विविध अभिव्यंजना : 1. सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी/सूर्य का व्यास = 108 = …

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