MP: कैग रिपोर्ट में खुलासा किसान कल्याण की राशि से अफसरों ने खरीद ली लग्जरी गाड़ियां

भोपाल- मध्य प्रदेश में CAG की रिपोर्ट में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। साथ ही किसान कल्याण के दावों पर भी सवाल उठे हैं। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक किसानों के विकास के लिए तय किए गए 5.31 करोड़ रुपए में से 4.79 करोड़ रुपए अफसरों ने लग्जरी गाड़ियां खरीदने में खर्च कर दिए। साथ ही खाद वितरण में भी गड़बड़ी पाई गई.

दरअसल, कैग की रिपोर्ट के अनुसार किसानों के सहकारी विकास के लिए 5.31 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। वहीं, अफसरों ने इसमें से 90% यानी 4.79 करोड़ रुपए लग्जरी गाड़ियां खरीदने में उड़ा दिए। यह बात गुरुवार को विधानसभा में पेश की गई CAG रिपोर्ट में सामने आई।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्य और जिला स्तर पर खाद के भंडारण की निगरानी अफसरों को करनी थी। लेकिन, उन्होंने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। इस वजह से खाद भंडारण का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। भोपाल की अमरावत कला समिति में खाद के स्टॉक में गड़बड़ी पाई गई। इससे सरकार को 14 लाख रुपए का नुकसान हुआ, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

CAG रिपोर्ट में बताया गया है कि 2017 से 2022 के बीच किसानों को वह खाद नहीं मिली जिसकी उन्हें जरूरत थी। बल्कि, उन्हें वही खाद दी गई जो उपलब्ध थी। खाद में पोषक तत्वों का ध्यान नहीं रखा गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत सैंपलिंग का सही तरीके से पालन नहीं हुआ। 18 प्रयोगशालाओं की जरूरत थी, लेकिन सिर्फ 6 प्रयोगशालाएं ही मौजूद हैं। निरीक्षकों और स्टाफ की कमी के कारण जांच समय पर नहीं हो सकी।

मध्य प्रदेश सरकार ने खाद की जरूरत का आकलन करते समय सब्जियों और उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र को शामिल नहीं किया। गलत आकलन और लक्ष्य के अनुसार प्रस्ताव न आने के कारण मार्कफेड सहकारी क्षेत्र के लिए कॉम्प्लेक्स खाद की खरीदी नहीं कर सका। खरीफ 2019 से खरीफ 2022 के दौरान 1,19,350 मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 4116 मीट्रिक टन खाद की खरीदी हो सकी।

CAG रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2023-24 के बजट प्रबंधन पर भी सवाल उठाए गए हैं। सरकार ने 3.72 लाख करोड़ का बजट पास किया, लेकिन खर्च सिर्फ 3.04 लाख करोड़ हुआ। इस तरह 67,926 करोड़ रुपए बिना खर्च हुए ही रह गए। इसके बावजूद सरकार ने दो सप्लीमेंट्री बजट के जरिए 57,963 करोड़ रुपए और मांगे, जबकि जरूरत केवल 28,885 करोड़ की थी। यानी 29,029 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया। 1,575 करोड़ रुपए का खर्च गलत तरीके से पूंजीगत खर्च में दिखाया गया।

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