मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गुरुजी ने दक्षिणा में मांगी सड़क

IMG-20180703-WA0034Oसीएम साहब, गुरु दक्षिणा में यह सड़क ही सही करा दीजिए
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अमिताभ पांडेय की रिपोर्ट
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कोलार उपनगर में प्रियंका नगर के पास साहू आटा चक्की से सटी यह सड़क (जो अब कीचड़ के दलदल में तब्दील हो चुकी है ) कोई साधारण सड़क नहीं है। सूबे के सीएम शिवराज सिंह चौहान से इसका गहरा नाता है क्योंकि इसी मार्ग पर उनके श्रद्धेय गुरु श्री प्रेम शंकर दुबे निवास करते हैं। सीएम साहब जब अपने राजनीतिक जीवन के शैशव काल में पैर चलना सीख रहे थे, तब इन्हीं गुरु ने उन्हें उंगली पकड़कर चलना सिखाया था। बात करीब साढ़े चार दशक पुरानी है। सीएम साहब जब मॉडल स्कूल टीटी नगर, भोपाल के छात्र थे, तब श्री दुबे वहां के प्रिंसिपल थे। सीएम साहब ने यहीं सियासत का पहला पाठ सीखा था, जब वे १९७४-७५ में स्कूल छात्र संघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। उन क्षणों को याद करके श्री दुबे का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
स्मृतियों के ताज़ा करते हुए वे अक्सर बताते हैं कि शिवराज जी अपने छात्र जीवन में कितने होनहार थे, हालाँकि बचपन की शैतानियां उनमें भी कम नहीं थी। श्री दुबे जी के शब्दों में,” शिष्य चाहे कितना ही होनहार क्यों न हो,लेकिन गुरु को कभी-कभी ‘भय बिन होय न प्रीत’ के सिद्धांत पर चलना ही पड़ता है। एक बार छात्रों का दल शैक्षणिक भ्रमण पर गोवा गया हुआ था। बालक शिवराज उस भ्रमण के दौरान जब ज़्यादा ही नटखट हो गए, तो मुझे उन्हें सख्ती से अनुशासन का पाठ पढ़ाना पढ़ा था। शायद वे भूले नहीं होंगे। ” अपने शिष्य शिवराज के प्रति उनका स्नेह आज तक कम नहीं हुआ है। सीएम साहब ने जब मध्यप्रदेश की सड़कों को अमेरिका से बेहतर बताया था, तब भी सामान्य बातचीत में दुबे जी ने उनके इस बयान का बचाव यह कहते हुए किया था कि शिवराज जी ने यह बात किन्हीं तथ्यों को ध्यान में रख कर कही होगी।
लेकिन आस-पास के रहवासी श्री दुबेजी का दर्द जानते हैं। वे जिस मार्ग पर रहते हैं, उसकी मरम्मत के लिए वे लंबे समय से भोपाल नगर निगम के अधिकारियों से मिन्नतें कर रहे हैं, लेकिन मोटी चमड़ी के अफसरों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है। सरकार का प्रचार तंत्र संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन का दावा करता नहीं थकता,लेकिन फील्ड में तैनात अफसरों को मानो जनता की तकलीफों से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने इस सड़क की मरम्मत कराना तो दूर, बल्कि मानसून से ठीक पहले इसे पानी की लाइन डालने के लिए खुदवा भी डाला। अब न ठेकेदार को चिंता और न ही अफसरों को। चाहे लोगों के वाहन फंसे या उनकी हड्ड़ियां टूटें। सीएम साहब के वयोवृद्ध गुरु ८५ वर्षीय दुबे जी भी इसी सड़क का इस्तेमाल करते हुए जैसे-तैसे सुबह की सैर पर निकलते हैं। अफसरों की चमड़ी की मोटाई को भांपते हुए उन्होंने मिन्नतें करना भी बंद कर दिया दिया है।
सीएम शिवराज ने पिछले साल कोलार में आयोजित एक जनसभा में क्षेत्र में २५ दिसंबर, २०१७ तक केरवा का पानी लाने की घोषणा क्या की कि अफसर पिल पड़े। जब पानी कोलार तक आ गया, तब भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसका खूब जश्न मनाया, लेकिन घर-घर कनेक्शन देने के नाम पर लोगों की ज़िन्दगी को नरक बना दिया गया। अफसरों ने पाइप लाइन डलवाने के लिए एक-एक गली-मोहल्ले की सड़कें खुदवा डालीं। मानसून से पहले उन्हें चलने लायक भी नहीं बनाया गया। नतीज़तन, इन दिनों कोलार के भीतर की एक-एक सड़क वर्षा से दलदल में बदल जाती है। इन सड़कों पर वाहन चलाना तो दूर, चलना भी मुश्किल है। नगर निगम के उदासीन रवैये से लोगों में आक्रोश पनप रहा है। कोलार के बाबा नगर और कस्टम कॉलोनी में लोग विरोधस्वरूप जूतों की माला बंदनवार बनाकर लटका भी चुके हैं। भाजपा के नेता-पार्षद भी फील्ड से नदारद हैं। एक किलोमीटर सड़क निर्माण का तीन बार भूमि पूजन कराने वाले क्षेत्रीय विधायक ने भी लोगों का दुःख-दर्द नहीं बांटा है। भाजपा के वे बूथ लेवल वर्कर भी लोगों से नज़रें चुरा रहे हैं, जो नेताजी के आने पर दरवाज़े ज़ोर-ज़ोर से खटखटा कर भीड़ जुटाते हैं। लोग अब सिर्फ भगवान भरोसे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों संत कबीर के बताए मार्ग पर चलने का आव्हान किया था। संत कबीर का ही दोहा है, “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाँय | बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय || ” रहवासियों को उम्मीद है कि सीएम साहब इसी सीख पर चलते हुए अपने वयोवृध्द गुरु श्री दुबे जी के चरण स्पर्श करेंगे और गुरु दक्षिणा के तौर पर सबसे पहले इसी सड़क को दुरुस्त कराएँगे, जहां उनके गुरु बसते हैं।।                               IMG-20180703-WA0031

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