छग : रमन के दामाद की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, पासपोर्ट जब्त करने की कांग्रेस की मांग

indexरायपुर, 25 मार्च (आईएएनएस)। लगभग 50 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपों का सामना कर रहे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद डॉ. पुनीत गुप्ता की मुश्किलें बढ़ने के आसार नजर आने लगे हैं। पुलिस विभागीय जांच के आधार पर सामने आई गड़बड़ियों के तथ्य जुटाने में लगी हुई है और उसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इस बीच कांग्रेस ने डॉ. गुप्ता का पासपोर्ट जब्त करने की मांग की है।

रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शेख आरिफ ने आईएएनएस से सोमवार को कहा, “डीके सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. के.के. सहारे द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर डॉ. पुनीत गुप्ता के खिलाफ जांच जारी है। सहारे ने सरकार द्वारा कराई गई जांच की रपट का अपनी शिकायत में हवाला दिया है। रपट में दर्ज गड़बड़ियों से संबंधित दस्तावेज संकलित किए जा रहे हैं। फिलहाज जांच जारी है।”

इस बीच, कांग्रेस ने डॉ. गुप्ता के देश छोड़कर भागने की आशंका जताई है। कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने एसएसपी को शिकायत कर डॉ. गुप्ता का पासपोर्ट जब्त करने की मांग की है।

शेख ने कहा कि इस संदर्भ में उन्हें शिकायत मिली है, और इस पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि रमन सिंह के दामाद डॉ. पुनीत गुप्ता पर रायपुर के दाऊ कल्याण सिंह (डीके) सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में अधीक्षक पद पर रहने के दौरान वित्तीय गड़बड़ियों, अनुमोदन के बगैर खरीदी किए जाने और फर्जी ऑडिट रिपोर्ट तैयार कराने तथा 50 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता के आरोप है।

अस्पताल के वर्तमान अधीक्षक के. के. सहारे ने गोल बाजार थाने में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने डॉ. गुप्ता के खिलाफ धारा 420 सहित आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।

डॉ. सहारे ने 15 मार्च को दर्ज कराई गई अपनी शिकायत में सरकारी स्तर पर कराई गई जिस जांच का हवाला दिया है, उसमें कहा गया है कि सरकार की तीन सदस्यीय जांच समिति (विशेष सचिव ए. पी. त्रिपाठी, संयुक्त सचिव प्रियंका शुक्ला और अतिरिक्त निदेशक रत्ना अजगले) ने पाया है कि डॉ. गुप्ता के कार्यकाल में व्यापक गड़बड़ियां हुई हैं।

शिकायत के अनुसार, 18 पृष्ठों की जांच रपट में कहा गया है कि डॉ. गुप्ता ने नियम विरुद्घ नियुक्तियां कीं, बगैर अनुमोदन की खरीदी की, और अपने को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी ऑडिट रिपोर्ट तैयार की। क्योंकि जिस चार्टर कंपनी से ऑडिट कराने की बात कही गई है, उस कंपनी ने ऑडिट करने की बात से ही इंकार कर दिया है। जबकि डॉ. गुप्ता ने इसी ऑडिट रपट के आधार पर बैंकों से कर्ज हासिल किया था।

डॉ. गुप्ता जनवरी 2016 से जनवरी 2019 तक डी.के. एस. अस्पताल के अधीक्षक रहे थे। इसके उनका स्थानांतरण किया गया तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

एसएसपी शेख ने कहा, “शिकायत में जो आरोप लगाए गए हैं, जांच रपट में जो तथ्य हैं, उसके संदर्भ में संबंधित जनों से संपर्क किया जा रहा है। चार्टर कंपनी और बैंकों से भी बात की जा रही है।”

सरकारी जांच रपट में कहा गया है कि बजट का उपयोग बगैर निविदाएं बुलाए किया गया है। सुरक्षा सेवा में अनुमानित बजट से तीन गुना लगभग 21 करोड़ रुपये की निविदा मंजूर की गई। इसी तरह कपड़े धोने की निविदा में बजट से तीन गुना लगभग 17 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

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