(खुसुर-फुसुर)– सिंहस्थ की ख़बरों को यथा-स्थिति प्रस्तुत करने पर भोपाल के कुछ वीर पत्रकारों को संस्थानों से बाहर करने की कवायद की खुसुर-फुसुर गलियारों में है.
दरअसल कुछ राष्ट्रवादी वीरों ने सिंहस्थ के दौरान अपनी तबियत के अनुसार सच्ची-मुच्ची की खबरें लिखीं वे ख़बरें छप भी गयी और मासूम जनता ने पढ़ भी लीं ,इससे खफा राष्ट्रवादियों ने इन राष्ट्रवादियों को सबक सिखाने की ठानी है,यह बात रात की टेबल मंडली की खुसुर-फुसुर से सूत्रों ने बाहर पहुंचा दीं.
अब जब बात लिखने से आम हो ही गयी है तो लाभार्थी राष्ट्रवादी शायद अब वह करने की हिम्मत ना उठा पायें जिसकी वे सोच रहे थे.बिहार में पत्रकारों पर जानलेवा हमला हुआ तो इस कार्यवाही से मप्र में हमले का यह स्वरूप होगा.अब देखना यह है की ऊँट किस करवट बैठता है.
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