भोपाल-यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर मध्य प्रदेश में विरोध तेज हो गया है। इसे लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों ने सोमवार को भोपाल के खानूगांव कैंपस में बैठक की। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के रुक्न-ए-आमला व कांग्रेस नेता आरिफ मसूद ने यूसीसी का विरोध किया।उन्होंने इसे मुस्लिम समुदाय के लिए स्वीकार नहीं करने की बात कही। शहर काजी ने कहा कि संविधान ने धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की गारंटी दी है। ऐसे में यूसीसी की जरूरत और इसके असर पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
शहर काजी ने आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर के 1972 में दिल्ली में दीनदयाल रिसर्च इंस्टीट्यूट के कार्यक्रम में दिए गए भाषण का हवाला देते हुए कहा कि गोलवलकर ने भी कहा था कि कौमी इत्तेहाद के लिए सिविल कोड कोई जरूरी चीज नहीं है।शहर काजी ने कहा कि मुस्लिम समाज यूसीसी को स्वीकार नहीं करता और पहले से ही इसके खिलाफ अपनी बात रखता आया है। उन्होंने कहा कि सरकार और जिम्मेदार लोगों को इस मामले में गंभीरता से सोचना चाहिए। उन्होंने कहा, जो हुकूमतें अल्पसंख्यकों पर जुल्म करती हैं, उनका सूरज गुरूब (अस्त) हो जाता है, उनका सफीना (जहाज) डूबता है और फिर वे दुनिया में पनप नहीं पातीं।
उन्होंने दावा किया कि इस भाषण का उल्लेख उस समय की मीडिया रिपोर्टों में भी हुआ था। शहर काजी ने कहा कि अगर मुसलमानों के पर्सनल लॉ का मामला है तो इसके बारे में मुस्लिम समाज और उसके जानकार ही अपनी बात रखेंगे। उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ को समझने के लिए उसे पढ़ना और उस पर अमल करना जरूरी है।
शहर काजी ने कहा कि मुस्लिम समाज यूसीसी को स्वीकार नहीं करता और पहले से ही इसके खिलाफ अपनी बात रखता आया है। उन्होंने कहा कि सरकार और जिम्मेदार लोगों को इस मामले में गंभीरता से सोचना चाहिए। उन्होंने कहा, जो हुकूमतें अल्पसंख्यकों पर जुल्म करती हैं, उनका सूरज गुरूब (अस्त) हो जाता है, उनका सफीना (जहाज) डूबता है और फिर वे दुनिया में पनप नहीं पातीं।
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